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NEET पेपर लीक से आहत मऊगंज की छात्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा- ‘सॉरी मम्मी-पापा दोबारा पेपर देने की हिम्मत नहीं है’

NEET Paper Leak: कर्ज लेकर बेटी का डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर रहा था पिता, नागपुर में छात्रा ने की आत्महत्या, अच्छे कॉलेज में एडमिशन होने का था भरोसा लेकिन नीट पेपर लीक होने से टूटा हौसला।
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सतना

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Shailendra Sharma

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Updated: 3 Jun 2026, 6:28 PM IST

mauganj

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NEET Paper Leak Student Suicide: 'मम्मी-पापा, आपका मुझ पर भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बन जाएगी। पर दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर'..ये वो आखिरी शब्द हैं जो मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी ने अपने सुसाइड नोट में लिखे हैं। आकांक्षा डॉक्टर बनना चाहती थी और उसका NEET (National Eligibility cum Entrance Test 2026) का पेपर भी अच्छा गया था। लेकिन जब पता चला कि नीट का पेपर लीक हो गया है और परीक्षा दोबारा होगी तो वो टूट गई और उसने अपनी जान दे दी। आकांक्षा के आत्महत्या करने से परिवार गहरे सदमे में है, बीते दिनों NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ परिजनों से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वनाएं देते हुए 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी।

अच्छे कॉलेज में एडमिशन का था भरोसा

मऊगंज के नईगढ़ी के मगनिया (पुरवा) गांव में रहने वाले कृष्णकुमार चतुर्वेदी की बेटी आकांक्षा उर्फ स्नेहा डॉक्टर बनना चाहती थी और नीट की परीक्षा भी उसने दी थी। पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि बेटी शुरुआत से ही पढ़ाई में अच्छी थी और अव्वल आती थी। नीट की परीक्षा देने के बाद भी आकांक्षा काफी खुश थी। उसने बताया था कि पेपर बहुत अच्छा गया है और अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा। लेकिन पेपर लीक होने के बाद से वो आहत थी और 20 मई को उसने नागपुर में आत्महत्या कर ली।

सुसाइड नोट में लिखा- 'सॉरी मम्मी-पापा अब हिम्मत नहीं है'

आकांक्षा ने आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा, जिसमें उसने लिखा है- मम्मी-पापा, आपका मुझ पर भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बन जाएगी। पर दोबारा नीट परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। पहले नीट के पेपर में मेरे अच्छे मार्क्स आ रहे थे, पर दोबारा पेपर अच्छा जाए इसकी कोई गारंटी नहीं। सॉरी मम्मी-पापा… मैंने सब बर्बाद कर दिया, आप दोनों का। स्नेहा (आकांक्षा)।

लकवा ग्रस्त हैं पिता, कर्ज लेकर पढ़ा रहे थे पिता

आकांक्षा के पिता कृष्णकुमार चतुर्वेदी ने बताया उन्हें कुछ समय पहले लकवा लग गया था। बेटी आकांक्षा बचपन से ही पढ़ने में ठीक थी और डॉक्टर बनना चाहती थी, इसलिए बैंक से क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 3 लाख रुपये का लोन लेकर उसकी तैयारी कराई। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बेटी को डॉक्टर की पढ़ाई करा पाता, इसलिए कुछ और लोगों से भी उधार लेने के बारे में सोच रखा था। जिससे कि बेटी की पढ़ाई में कोई दिक्कत न हो और वो डॉक्टर बनकर अपना सपना पूरा कर सके, लेकिन सबकुछ बर्बाद हो गया।

बेटी को याद कर फूटा मां का दर्द

आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी का बेटी के आत्महत्या करने से रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि बेटी के साथ हम लोगों ने भी डॉक्टर बनने का सपना देखा था। वो परीक्षा देकर आई तो काफी खुश थी और कह रही थी कि 650 से अधिक अंक मिलेंगे। पूरा परिवार खुश था, लेकिन परीक्षा निरस्त होते ही वह टूट गई और आत्महत्या कर लिया। अब पछतावा हो रहा है कि बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना क्यों देखा? कुछ और बनाने के लिए पढ़ाई कराती तो वह जिंदा तो रहती।