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SATNA सीवर लाइन: घोटाले की बैकफिलिंग से धसक रही सड़कें

सीवर ठेकेदार ने अपनी कमाई के लिए नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से सीवर ट्रंच को तय मापदंडों के अनुसार बैक फिल नहीं किया। नतीजा अब धसकती सड़कों के रूप में सामने है...
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सतना। शहर में शायद ही ऐसा कोई दिन जाता होगा जिस दिन शहर के खस्ताहाल रेस्टोरेशन की वजह से टूटी सड़क का कोई वीडियो या मीम वायरल न होता हो। शहर की जनता पहले सीवर खुदाई की वजह से परेशान थी और अब टूटते, दरकते, भसकते रेस्टोरेशन से आजिज आ गई है। लेकिन मजाल क्या कि निगम के अफसरानों के चेहरे पर कोई शिकन आ रही हो। न तो जिम्मेदारों पर कोई कार्यवाही हो रही है न ही ठेकेदार को कोई दंड मिल रहा है। अलबत्ता निगम के जिम्मेदार अफसर तो सीवर ठेकेदार के बचाव में खुद ही खड़े हो जाते हैं और अपने से गढ़े गए नये नये नियम बताने लगते हैं। जबकि हकीकत यह है कि सीवर लाइन डालने के लिए खोदे गए ट्रंच की मानक तरीके से फिलिंग नहीं की गई। दूसरा बड़ा कारण यह है कि बाजार क्षेत्र में खुदे ट्रंच के रेस्टोरेशन को चेंबर चुनाव के मद्देनजर इतना दबाव बनाया गया कि प्रतिकूल स्थिति में रेस्टोरेशन करना पड़ा। यह स्थिति तब बनी जब ठेकेदार और ठेका एजेंसी निगम के अफसरों को स्पष्ट चेताती रही कि इतनी जल्दबाजी में काम किया गया तो रेस्टोरेशन वाली सड़क का हिस्सा बैठ जाएगा, और अब वह होने भी लगा है।

सूत्रों की माने तो सीवर लाइन प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से लाखों रुपए बचाने का खेल किया गया है। जिसका नतीजा जनता भुगत रही है। पहले तो खुदाई में गड़बड़झाला किया गया और एग्रीमेंट के विपरीत खुदाई की गई। नियमानुसार ढाई सौ मीटर से ज्यादा एक साथ खुदाई नहीं करनी थी। इस खुदाई के बाद पाइप लाइन बिछाकर बैकफिलिंग करके आगे बढ़ना था। लेकिन ठेकेदार ने अपनी खुदाई की लागत बचाने के लिए कई किलोमीटर तक की खुदाई कर डाली। जिससे जनता परेशान होती रही। इसके बाद हुआ बैकफिलिंग घोटाला जिसकी वजह से अब रेस्टोरेशन की ऊपरी सीसी परत धसक रही है जो जनता के लिए परेशानी का सबब बन गई है।

एग्रीमेंट के अनुसार इस तरह करना था बैकफिलिंग

बाजार क्षेत्र में सीवर लाइन प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने ठेका कंपनी एनविराड से जो एग्रीमेंट किया है, उसके पेज नंबर 94 के क्लाज नंबर 2 में ट्रंच की रिफिलिंग के नियम निर्धारित किए गए हैं। इसमें स्पष्ट बताया गया है कि बैक फिलिंग के लिए ट्रेंच को तीन हिस्सों में बांटना होगा। पहला जोन ए होगा जो बेडिंग अर्थात पाइप के नीचे मिट्टी की सतह से पाइप के बीच का हिस्सा होगा। इसके लिए 15 सेंटी मीटर की परत में मिट्टी की हाथ से भराई होगी। हर 15 सेंटी मीटर के बाद हैंड टैंपर के जरिए इस परत को काम्पैक्ट करना था। दूसरा जो बी जोन था जिसमें पाइप की सेंटर लाइन से 30 सेंटीमीटर 15 सेंटीमीटर की परत में मिट्टी हाथ से भरना था और हाथ से ही कम्पेक्शन करना था। इसके ऊपर का जोन सी जोन तय किया गया है जो पाइप के ऊपर 30 सेंटी मीटर से जमीन की सतह तक होगा। इसकी बैक फिलिंग मशीन से होनी है। लेकिन फिलिंग 15 सेंटी मीटर 15 सेंटीमीटर की परत में होगी। प्रत्येक परत को पानी देकर कम्पैक्ट किया जाएगा। कम्पैक्शन के लिए अर्थ कॉम्पैक्टर का उपयोग किया जाएगा। हर लेयर की डेंसिंटी 90 फीसदी एमडीडी होगी। लेयर की डेंसिंटी निगम के अधिकारी करेंगे और इसका रिकार्ड रखेंगे।

इस तरह किया गया बैक फिलिंग का काम

बाजार क्षेत्र में अभी हाल में जो बैक फिलिंग का कार्य किया गया है उसमें एक भी मानक का पालन नहीं किया गया। लेयर बनाकर फिलिंग ही नहीं की गई। सीधे मशीन से मिट्टी डाल दी गई और उसे छोड़ दिया गया। न तो फिलिंग की डेंसिटी चेक की गई और न ही अर्थ कॉम्पैक्टर का उपयोग किया गया। इस तरह लेयर बनाने, पानी डालने और कॉम्पैक्टर का खर्च बचा लिया गया। यह पूरा काम एनविराड द्वारा किया गया।

यह हो रहा परिणाम

अब जब बैक फिलिंग के बाद सबसे ऊपर रेस्टोरेशन के लिए दूसरी निर्माण एजेंसी स्मार्ट सिटी द्वारा सीसी का कार्य किया जा रहा है तो बारिश का पानी बैक फिल में जाकर मिट्टी को बैठा रहा है। जिससे सीसी रेस्टोरेशन धसक रहा है।

स्मार्ट सिटी और ठेकेदार की चेतावनी की अनदेखी

सीसी रेस्टोरेशन का कार्य करने के पहले मौका मुआयना करने के बाद स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने नगर निगम के अधिकारियों को साफ चेताया था कि इस मिट्टी को शेटल होने के लिए वक्त चाहिए। क्योंकि अगर ऊपर से रोलर के जरिए काम्पैक्ट करेंगे तो अधिकतम एक मीटर तक का हिस्सा कॉम्पैक्ट होगा। क्योंकि जांच में पाया गया है कि बैक फिलिंग मापदंडों के तहत नहीं की गई। लेकिन नगर निगम के सहायक यंत्री ने एक नहीं सुनी। इसी दौरान चेंबर चुनाव को लेकर व्यापारियों द्वारा आंदोलन प्रदर्शन शुरू हो गए लिहाजा निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने भी ठेकेदार पर दबाव डाला। इस पर ठेकेदार ने भी लिखकर चेताया कि ऐसे में सीसी वर्क धंस जाएगा। लेकिन ठेकेदार की भी नहीं सुनी गई। नतीजा सीसी का काम किया गया और आज सड़क धसक रही हैं।

पल्ला झाड़ते नजर आए जिम्मेदार सब इंजीनियर

जब सीवर लाइन ट्रंच की बैक फिलिंग के मानक को लेकर संबंधित सब इंजीनियरों से बात की गई तो वे पल्ला झाड़ते नजर आए। उपयंत्री हर्षिता बैरागी ने तो यह काम कभी नहीं देखने की बात कही। जबकि नवंबर 2024 को जारी आदेश में जोन 2 और जोन 3 का सीवर लाइन का काम उन्हें दिया गया था। उनके बाद आए अतुल सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पूरे नियम में काम हुआ है। लेयर में और पानी डालकर काम किया गया है। जब काम्पैक्टर और अन्य नियमों की जानकारी चाही गई तो उन्होंने गाड़ी ड्राइव करने की बात कहते हुए बाद में बात करने को कहा। उसके बाद से वे फोन ही नहीं उठा रहे हैं।

ये हैं दोषी

1- सीवर लाइन की खुदाई और बैक फिलिंग का कार्य करने वाली ठेका कंपनी एन विराड

2- संबंधित प्रभारी उपयंत्री जिनका जिम्मा था कि वे तय एग्रीमेंट के तहत काम करवाते इनमें हर्षिता बैरागी, अतुल सिंह, रविराज सिंह

3- संबंधित प्रभारी सहायक यंत्री केपी गुप्ता जिनका जिम्मा था कि वे उपयंत्रियों द्वारा कराए गए काम को मॉनीटर करते, डेंसिटी रिपोर्ट देखते और औचक निरीक्षण करते

4- संबंधित क्षेत्र के पार्षद जो गुणवत्ताहीन काम होने पर निगम के अधिकारियों को सचेत करते

5- निगमायुक्त संपूर्ण काम के नियोजित और नियमबद्ध तरीके से कराने का जिम्मा है

5 - महापौर जिनका जिम्मा था कि वे सभी की लगातार बैठके लेकर सही काम के लिए बाध्य करते

"हमने सीवर ट्रंच की बैक फिलिंग की स्थितियों से नगर निगम के अधिकारियों को सचेत किया था और वक्त मांगा था। लेकिन काम करने के लिए लगातार कहा गया।" - अजय गुप्ता, सहायक यंत्री स्मार्ट सिटी

"बैक फिलिंग पूरे मापदंडों के तहत हुई है। बकायदे पानी डाला गया है। लेयर पर काम किया गया है। कोई कमी नहीं की गई है सीवर ठेकेदार के द्वारा।" - केपी गुप्ता, सहायक यंत्री व सीवर लाइन प्रभारी

"खुदाई के बाद बैक फिलिंग के नाम पर सीधे मशीन से मिट्टी डाल दी गई है। न परत बनाई गई, न पानी डाला गया, न कॉम्पैक्टर चलाया गया। यह पूरा काम मैने खुद देखा है। अगर ऐसा कह रहे हैं तो गलत बता रहे हैं। इस क्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं हुआ है।" - राकेश अग्रवाल, स्थानीय निवासी