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बैठक में कमिश्नर का अजब निर्देशः पेशाब के लिए बाहर निकले अधिकारियों का कराया शुगर टेस्ट

संभागायुक्त का एक निर्देश चर्चा का विषय बन गया है। पेशाब के लिए मीटिंग हाल से बाहर निकले अधिकारियों का उन्होंने शुगर टेस्ट करवाया। लगभग 5 घंटे चली इस बैठक में महिला अधिकारी असहज नजर आईं
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सतना। मैहर में संभागायुक्त रीवा शीलेन्द्र सिंह की समीक्षा बैठक के दौरान गुरुवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बैठक के बीच जो अधिकारी पेशाब के लिए बाहर निकले, उनका तत्काल शुगर (ब्लड ग्लूकोज) टेस्ट कराने के निर्देश संभागायुक्त ने दिए। निर्देश मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मीटिंग हॉल के बाहर आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात हो गई और बाहर आने वाले अधिकारियों की जांच शुरू कर दी। टेस्ट में 49 अधिकारियों में से 19 का शुगर लेबल हाई पाया गया।

बताया गया कि समीक्षा बैठक के दौरान कुछ अधिकारियों के बार-बार बाहर जाने पर संभागायुक्त ने इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जोड़ते हुए उनके शुगर स्तर की जांच कराने को कहा। इसके बाद स्वास्थ्य अमले ने मौके पर ही ग्लूकोमीटर से संबंधित अधिकारियों का ब्लड शुगर टेस्ट किया। वरिष्ठ अधिकारियों की माने तो संभागायुक्त का उद्देश्य किसी अधिकारी को असहज करना नहीं, बल्कि यह जानना था कि कहीं बार-बार पेशाब आने की वजह मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है। वहीं कुछ लोग इसे समीक्षा बैठक का सबसे अप्रत्याशित घटनाक्रम भी बता रहे हैं। इनका कहना है कि पांच घंटे की बैठक में लोगों का पेशाब जाना स्वाभाविक है। इसके अलावा किसी की निजी स्वास्थ्य जांच बिना उसकी मर्जी के इस तरह नहीं कराई जा सकती है जब तक की कोई इमरजेंसी की स्थिति नहीं है। ऐसे में महिला अधिकारियों के लिए यह घटना तो और भी विपरीत स्थिति वाली हो जाती है। हालांकि इस घटना को लेकर अधिकारियों के बीच मिले जुले स्वर सामने आ रहे हैं।

फार्मर रजिस्ट्री एसडीएम की लगाई क्लास

संभागायुक्त शीलेन्द्र सिंह ने गुरुवार को मैहर जिले के विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। ज्यादातर कार्यों और योजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं मिली। जिस पर संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा के दौरान एसडीएम की जमकर क्लास ली। ग्रामीण विकास विभाग में आवास योजना की प्रगति और भुगतान धीमी होने पर प्रभारी का एक माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए। सभी अधिकारियों को 15 दिन की टाइम लाइन प्रगति बढ़ाने के लिए दी है। कहा, इस अवधि में अगर प्रगति परिलक्षित नहीं हुई तो कार्यवाही के लिए तैयार रहें। अधिकारियों से कहा कि मुझे इधर उधर की सफाई मत दीजिए। हम भी फील्ड में रहे हैं और हमें सब पता है। एनआरएलएम के तहत मैहर डॉल नाम से शुरू हुए नवाचार को लेकर संभागायुक्त ने कलेक्टर की सराहना की। इस दौरान कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी, अपर कलेक्टर संजना जैन, जिपं सीईओ शैलेन्द्र सिंह सहित सभी एसडीएम, सभी विभागों के जिला प्रमुख सहित अन्य मौजूद रहे।

आवास योजना प्रभारी का वेतन रोका

संभागायुक्त ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से समीक्षा की शुरुआत की। इस दौरान अधिकारी जब अपनी सफाई देने लगे तो कहा, मुझे ये हो जाएगा नहीं सुनना है। मुझे तो आप लोग यह बताओ कि टारगेट क्यों पूरा नहीं कर सके। बहानेबाजी नहीं चलेगी काम करना होगा। आवास योजना की समीक्षा में भुगतान की प्रगति धीमी होने पर प्रभारी का एक माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए। चेताया कि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो सेवा समाप्त कर देंगे। मनरेगा मामले में पुराने कार्य खत्म करने और वीबी जी रामजी में कोई काम शुरू नहीं होने पर जनपद सीईओ पर नाराज हुए। एक बगिया मां के नाम पर हितग्राहियों के खर्च की फीडिंग काफी कम पाई। कहा, इसमें तो कोई राशि खर्च नहीं करनी थी। आप लोग फीडिंग तक नहीं करवा पा रहे हैं। जनपद सीईओ जब सफाई देने लगे तो कहा मुझे यह नहीं बताए। आप लोग सिर्फ मटरगस्ती कर रहे हैं। बड़े अधिकारी बन गए हैं और फील्ड में जा नहीं रहे हैं। यह आदत सुधार लें तो बेहतर रहेगा। शौचालयों की स्वीकृति के बाद भी निर्माण नहीं होने पर प्रभारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि न तो आप देखते हो और न ही जीआरएस पर लगाम है। पूरा खेल पैसे का होता है। जो निर्माण नहीं कर रहे हैं उनसे रिकवरी कीजिए।

जब खुद पता नहीं तो पटवारी के बताने पर चलोगे

संभागायुक्त ने फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा में एसडीएम से कहा कि एप पर अपनी फार्मर रजिस्ट्री करके बताएं। एसडीएम इसे पूरा नहीं कर पाए। इस पर संभागायुक्त ने कहा कि जब आपको ही नहीं पता है तो नीचे वालों की समस्या क्या हल करेंगे। जो पटवारी और तहसीलदार बता देंगे वही मान लेंगे। कलेक्टर से कहा कि इनकी ट्रेनिंग कराएं। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को भी इस मामले में खड़े कर के फटकार लगाई। कहा, पटवारियों के भरोसे रहना बंद करो। नियमित समीक्षा करों। नामांतरण और बंटवारा की प्रगति कमजोर मिलने पर नाराजगी जाहिर की।

आबकारी अधिकारी पर खड़े किए सवाल

आबकारी विभाग की समीक्षा में कहा कि जो 59 लीटर कच्ची शराब जब्त करना दिखा रहे हो इतना तो एक घर में मिल जाएगा। आबकारी अधिकारी ने कहा कि यहां पर इतनी शराब बनाने का चलन नहीं है। संभागायुक्त ने कहा कि ऐसे ही रीवा में पूछा था तो बताया गया कि यहां एमडी ड्रग्स नहीं चलती है। बाद में एमडी ड्रग्स का बड़ा मामला सामने आया। मैं फील्ड में जाऊंगा और शराब के अवैध कारोबार दिखा तो आपको छोड़ूंगा नहीं।

तो डीईओ को नोटिस दो

शिक्षा विभाग की समीक्षा में रिजल्ट कम होने पर डीईओ से पूछा कि क्या किया इस पर। तत्कालीन डीईओ ने बताया कि सभी को नोटिस दी गई है और कार्यवाही प्रस्तावित किए हैं। इस पर कलेक्टर ने बताया कि मैनें खुद समीक्षा बैठक ली थी। जिसमें कमजोर रिजल्ट वालों पर कार्यवाही के लिए कहा था लेकिन इन्होंने कुछ किया नही। इस पर संभागायुक्त ने कहा कि फि्र इन्हें ही नोटिस जारी कीजिए। संभागायुक्त ने कहा कि मेरे निरीक्षण में अगर 5वीं तक बच्चे अगर पढ़ नहीं पाए तो सब पर कार्यवाही की जाएगी। शत-प्रतिशत विद्यालयों में शौचालयों की साफ-सफाई का कार्य स्वच्छता साथी के माध्यम से कराने के निर्देश दिए।

शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर करें

संभागायुक्त ने पुलिस अधीक्षक से कहा कि केजेएस तिराहे से मैहर मंदिर तक की यातायात व्यवस्था और दुरुस्त करने की जरूरत है। यहां लगातार जाम की स्थिति बनती रहती है। इसे प्राथमिकता में शामिल करें।