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घटिया चेक डैम बनाने वाले सहायक यंत्री, उपयंत्री सहित सरपंच, सचिव से होगी 11 लाख की वसूली

पंचायतीराज के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने भ्रष्टाचार की गंगा बहाई। जिस वजह से इनका बनाया डैम फूट गया। अब गबन की राशि जमा करनी होगी नहीं तो जाना होगा जेल।
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सतना। उचेहरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत जाखी के ग्राम लखमद में बनाए गए चेक डैम का निर्माण मापदंडों के अनुकूल नहीं किया गया था। सही ड्राइंड डिजाइन नहीं तय की गई थी, घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था और गुणवत्ताहीन निर्माण कराया गया था। जिससे चेक डैम की विंग वॉल पूरी तरह ध्वस्त हो गई, मेन वॉल क्रेक हो चुकी है और साइड वाल भी टूट गई है। जिससे चेक डैम का बचा हुआ स्ट्रक्टर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है। इस मामले में न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सतना ने चेक डैम निर्माण की लागत 11.10 लाख रुपए की वसूली के आदेश जारी किए हैं।

इनसे वसूली जाएगी राशि

यह राशि तत्कालीन उपयंत्री धर्मेन्द्र कोरी, तत्कालीन सहायक यंत्री समीर कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सरपंच द्रोपदी बाई, तत्कालीन सचिव बृजकिशोर द्विवेदी और रोजगार सहायक लखन प्रजापति से बराबर-बराबर सभी से 2.22 लाख रुपए वसूली जाएगी। 10 दिन में राशि जमा नहीं करने पर धारा 92 का जेल वारंट जारी कर सिविल जेल भेजा जाएगा। साथ ही मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

यह है मामला

जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में ग्राम पंचायत द्वारा लखमद नाला में 11,10,913 रुपए लागत से चेक डैम बनाया गया था। इस चेक डेम के बह जाने पर जनवरी 2024 में उचेहरा एसडीएम ने जांच दल गठित कर इसकी जांच कराई। जिसमें निर्माण कार्य घटिया होना पाया गया। साथ ही यह भी पाया गया कि जो हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है उसका कुल मूल्यांकन 3.54 लाख रुपए है। इस पर इस राशि से क्षतिग्रस्त एवं टूटे भाग का सुधार करने का एक सप्ताह का समय दिया गया। साथ ही कहा गया कि तय समय पर कार्य नहीं कराया जाता है तो कार्य में व्यय 11.10 लाख पुरी राशि वसूली योग्य होगी। अभिलेखों की जांच में पाया गया कि गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है, निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया है। इसके बाद इस कार्य की जांच अधीक्षण यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रीवा मंडल द्वारा कराई गई। जिसमें कहा गया कि बगैर हाइड्रोलिक डिजाइन के चेक डैम का प्राक्कलन और निर्माण कराया गया। लिहाजा इसके लिए प्राक्कलन बनाने वाले उपयंत्री और तकनीकि स्वीकृति देने वाले सहायक यंत्री दोषी है।

सभी को नोटिस जारी, जवाब संतोषजनक नहीं

मामला बाद में न्यायालय जिपं सीईओ के यहां पहुंचा। सभी को नोटिस जारी कर जवाब लिया गया। जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। पाया गया कि गलत डिजाइन और गलत स्थल का चयन किया गया। इससे न केवल स्ट्रक्चर की उपयोगिता नहीं हो सकी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। सरहद्दी किसानों को भी नुकसान हुआ। अब ग्राम पंचायत को अनुपयोगी ढांचे को हटाने का आदेश दिया गया है। साथ ही सभी संबंधितों को राशि जमा करने आदेशित किया गया है।

"अगर संबंधित जन समय सीमा में राशि जमा नहीं करते हैं तो उनपर जेल वारंट जारी कर सिविल जेल भेजने की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। यहां नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किया गया है।" - शैलेन्द्र सिंह, जिपं सीईओ