
सतना। प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासी समाज के खिलाफ दर्ज कुछ प्रकरण वापस लेने की मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल शुरू हो गया है। सतना जिले में ऐसे 29 आपराधिक प्रकरणों की सूची तैयार की गई है, जिन्हें वापस लेने की कार्रवाई की जाएगी। इनमें 15 प्रकरण आबकारी विभाग तथा 14 प्रकरण पुलिस विभाग के हैं। अधिकांश मामलों में आदिवासी आरोपियों पर मारपीट, गाली गलौज, धमकी और आबकारी कानून के उल्लंघन के सामान्य अपराधों के आरोप दर्ज हैं।
सीएम ने की थी घोषणा
जिले में तैयार की गई संशोधित सूची में केवल सतना जिले के प्रकरण शामिल किए गए हैं। इससे पहले सतना और मैहर दोनों जिलों के मामलों का संकलन किया गया था, लेकिन जिला पुनर्गठन को लेकर बाद में मैहर के प्रकरण अलग कर दिए गए। अब सतना जिले संशोधित सूची संबंधित विभाग को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। दरअसल मुख्यमंत्री ने अपनी घोषणा में कहा था कि मध्यप्रदेश में जनजातीय समाज के विरुद्ध दर्ज कतिपय प्रकरणों की जांच कराई जाकर प्रकरण वापस लेने की कार्यवाही की जाएगी। इसी घोषणा को लेकर यह कवायद प्रारंभ की गई है।
ज्यादातर मामले अवैध शराब रखने के
सूची के अनुसार आबकारी विभाग के अधिकांश मामलों में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन, या बिक्री से जुड़े सामान्य अपराध है। इसमें बड़े पैमाने पर शराब का अवैध कारोबार नहीं पाया गया है। वहीं पुलिस विभाग के प्रकरणों में भारतीय दंड संहित (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मारपीट, गाली-गलौज, धमकी जैसे सामान्य अपराध शामिल हैं।
इन थाना क्षेत्रों के मामले
जिन मामलों को वापस लेने के लिए चिन्हित किया गया है, वे अलग-अलग थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं। इनमें कोठी, रामपुर बाघेलान, रामनगर, नागौद, कोलगवां, सिंहपुर, बरौंधा, जैतवारा सहित अन्य थाना क्षेत्रों के मामले शामिल हैं। अधिकांश प्रकरण वर्ष 2020 से 2025 के बीच दर्ज किए गए थे। अब सूची के आधार पर अभियोजन और संबंधित विभाग न्यायालयों में प्रकरण वापसी की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करेंगे। न्यायालय की अनुमति मिलने के बाद ही इन मामलों में अंतिम रूप से प्रकरण वापस माने जाएंगे।
यह है केस वापसी की प्रक्रिया
इसके तहत सबसे पहले ऐसे प्रकरणों की पहचान कर सूचीबद्ध किया जाता है जो गैर-गंभीर (सामान्य धारा वाले) हों। इसके बाद जिला स्तर पर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और लोक अभियोजक की एक समिति इन मामलों की समीक्षा करती है कि वे वापस लेने योग्य हैं या नहीं। इसके बाद गृह विभाग मामलों की सूची को राज्य कैबिनेट (मंत्रिमंडल) के समक्ष रखता है। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित जिले के सरकारी वकील के द्वारा अदालत में केस वापसी का आवेदन लगाया जाता है। आवेदन पर विचार करने के बाद संबंधित न्यायालय प्रकरण को खत्म करने या वापस लेने की अनुमति प्रदान करता है।
Updated on:
08 Jul 2026 09:53 am
Published on:
08 Jul 2026 09:53 am
