सतना

सीहोर से प्रयागराज के नाम पर जारी हो रहे परमिट, सतना में खप रही लहसुन!

13 लाख का माल जब्त, रात में ट्रक भी पकड़ा, डिलौरा सब्जी मंडी में बिना लाइसेंस चल रहा कारोबार। एक ही दिन में दो फर्मों से 83 क्विंटल लहसुन जब्त। तीसरी दुकान सील। रात में पकड़े गए ट्रक में भी सीहोर से माल आने का पैटर्न। अब सीहोर मंडी की भूमिका पर उठे सवाल।
5 min read
• •
Updated: 1 Nov 2026, 11:20 AM IST
mandi

सतना। कागजों में लहसुन का सफर सीहोर से प्रयागराज तक का था, लेकिन माल पहुंच रहा था सतना के डिलौरा में। दूसरे राज्य में बिक्री के लिए जारी मंडी अनुज्ञा-पत्र का इस्तेमाल सतना में कारोबार के लिए किया जा रहा था। यहां न संबंधित व्यापारियों के पास मंडी का लाइसेंस था और न ही कारोबार के लिए वैध दस्तावेज। डिलौरा स्थित गांधी सब्जी बाजार में एसडीएम सिटी के नेतृत्व में मंडी प्रशासन की छापामार कार्रवाई ने लहसुन के इस कारोबार की परतें खोल दी हैं। दिन में दो फर्मों से 83 क्विंटल लहसुन जब्त की गई, जिसकी कीमत 13 लाख 3 हजार 100 रुपए आंकी गई। रात में इसी बाजार में लहसुन से लदा एक ट्रक भी पकड़ लिया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इस खेप में भी सीहोर से माल मंगाए जाने का पैटर्न सामने आया है।

लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सीहोर कृषि उपज मंडी समिति की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर वहां से किस आधार पर व्यापारियों को अंतरराज्यीय परिवहन की अनुमति दी जा रही है? क्या अनुमति जारी करने से पहले संबंधित व्यापारी के कारोबार, लाइसेंस और माल की वास्तविक मंजिल का सत्यापन किया जा रहा है? यदि प्रयागराज की फर्म के नाम पर अनुमति जारी हुई तो माल सतना कैसे पहुंच गया? और क्या सीहोर से जारी दस्तावेजों के आधार पर इस तरह का कारोबार पहले भी होता रहा है? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

सीहोरे से प्रयागराज के लिए जारी इस परमिट पर सतना में अनलोड हुई लहसुन

प्रयागराज की फर्म के नाम पर परमिट, माल सतना में मिला

मंडी प्रशासन की जांच में सबसे महत्वपूर्ण मामला कामना ट्रेडर्स के संचालक आनंद कुमार कुशवाहा का सामने आया। फर्म के परिसर से 48 क्विंटल लहसुन मिली, जिसकी अनुमानित कीमत 7 लाख 53 हजार 600 रुपए है। जांच के दौरान फर्म संचालक ने खरीद के संबंध में सीहोर कृषि उपज मंडी समिति का 28 अक्टूबर 2026 को जारी अनुज्ञा-पत्र प्रस्तुत किया।

इस अनुज्ञा-पत्र का क्रमांक 26103017728101859 है। दस्तावेज के अनुसार, यह अनुमति सीहोर से आनंद कुमार ट्रेडर्स, इलाहाबाद (प्रयागराज) के लिए राज्य के बाहर उपयोग के उद्देश्य से जारी की गई थी। लेकिन जिस माल को प्रयागराज पहुंचना था, वह सतना के डिलौरा स्थित गांधी सब्जी बाजार में मिला। यहां कामना ट्रेडर्स के पास सतना मंडी समिति की कोई वैध व्यापारिक अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) भी नहीं थी।

यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है। दूसरे राज्य में माल ले जाने के लिए जारी दस्तावेज का उपयोग स्थानीय स्तर पर कारोबार और भंडारण में कैसे हुआ? क्या सीहोर मंडी से जारी अनुमति की शर्तों का सत्यापन किया गया था? क्या माल की वास्तविक आवाजाही पर कोई निगरानी थी? यदि दस्तावेज प्रयागराज के लिए था तो सतना में माल मिलने की जानकारी संबंधित मंडी समिति तक क्यों नहीं पहुंची? इन पहलुओं की जांच जरूरी है।

बिना लाइसेंसधारियों को सीहोर मंडी से इस तरह जारी हो रहे परमिट

दूसरी फर्म के पास भी नहीं था लाइसेंस, केवल साधारण बिल

कार्रवाई में दूसरी फर्म चंदन कुमार लाल प्रसाद के संचालक चंदन कछवाहा के यहां से 35 क्विंटल लहसुन जब्त की गई। इसकी अनुमानित कीमत 5 लाख 49 हजार 500 रुपए है। इस फर्म के पास भी सतना मंडी समिति की वैध व्यापारिक अनुज्ञप्ति नहीं मिली। खरीद के प्रमाण के रूप में संचालक ने केवल एक सामान्य बिल प्रस्तुत किया, जिसे मंडी प्रशासन ने नियमों के तहत विधिमान्य दस्तावेज नहीं माना।

दोनों फर्मों से कुल 83 क्विंटल लहसुन जब्त हुई। इसकी कीमत 13 लाख 3 हजार 100 रुपए आंकी गई है। जांच दल को बाजार की तीसरी दुकान में भी लहसुन का अवैध भंडारण मिला। उस समय व्यापारी दुकान बंद कर जा चुका था। संपर्क करने पर उसने परिवार में मृत्यु होने की जानकारी दी। इसके बाद रात में दुकान का भौतिक सत्यापन कर उसे पंचों की मौजूदगी में सील कर दिया गया।

रात में पकड़ा गया ट्रक, इसमें भी सीहोर से ही लहसुन लाई गई। लहसुन लाने का कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं हो सका

रात में पकड़ा ट्रक, फिर सामने आया सीहोर कनेक्शन

दिन की कार्रवाई के बाद मंडी प्रशासन ने बाजार की निगरानी जारी रखी। इसी दौरान रात करीब 8.30 बजे मुखबिर की सूचना पर जांच दल ने डिलौरा में प्रवेश कर रहे लहसुन से लदे एक ट्रक को रोक लिया। वाहन चालक अथवा कब्जेदार से मंडी प्रवेश शुल्क, मंडी अनुज्ञा-पत्र और वैध क्रय-विक्रय बिल मांगे गए, लेकिन मौके पर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मंडी प्रशासन ने मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत लहसुन सहित वाहन जब्त कर लिया। वाहन और माल को अग्रिम आदेश तक सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। प्रारंभिक जानकारी में इस खेप के लिए भी सीहोर से लहसुन मंगाए जाने का पैटर्न सामने आया है।

संगठित तरीके से सरकारी खजाने को लगा रहे चूना!

एक ही दिन में सीहोर से जारी दस्तावेजों के आधार पर सतना में लहसुन मिलने और फिर इसी तरह के पैटर्न वाले ट्रक के पकड़े जाने से मामला केवल दो स्थानीय व्यापारियों तक सीमित नजर नहीं आता। पूरा पैटर्न बता रहा है कि यह संगठित गिरोह का काम है। जिसमें सीहोर मंडी और वहां के व्यापारी भी शामिल हैं। इस खेल से यह भी स्पष्ट है कि अंतरराज्यीय परिवहन के लिए जारी होने वाले परमिट स्थानीय स्तर पर मंडी शुल्क और लाइसेंस संबंधी नियमों से बचने का जरिया बन रहे हैं। इसमें सतना मंडी के लोग भी शामिल हैं। पकड़े जाने पर समझौता शुल्क बना कर मामला रफा दफा कर देते थे। अव्वल तो मामला बनाया ही नहीं जाता था। लेकिन इस छापे में एसडीएम राहुल सिलाडिया शामिल हुए, जिससे मंडी इंसपेक्टरों की चल नहीं पाई और पूरा खेल सामने आ गया।

एसडीएम के नेतृत्व में मंडी में कार्रवाई करने पहुंचा दल

समझौते के बजाय न्यायालय में जाएगा मामला

मंडी प्रशासन ने जब्त लहसुन नाशवान उपज होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखने के लिए मंडी के वैध अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी की अभिरक्षा में सुपुर्द किया है। इसके लिए सुपुर्दगीनामा निष्पादित कराया गया है। मंडी प्रशासन के अनुसार कि दस्तावेजों के दुरुपयोग, बिना लाइसेंस कारोबार और मंडी नियमों के उल्लंघन की गंभीरता को देखते हुए शमन राशि लेकर मामला समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रकरण जिला न्यायालय सतना में परिवाद के रूप में प्रस्तुत करेंगे। कार्रवाई के संबंध में संबंधित निरीक्षक को भी कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया जा रहा है। पूरी कार्रवाई भारसाधक अधिकारी एवं एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया के नेतृत्व में मंडी सचिव करुणेश तिवारी सहित जांच दल ने की।

Updated on:
1 Nov 2026, 11:20 AM IST
Published on: