सतना, रीवा और सीधी के हाल भी बेहाल, दो दर्जन जिलों का टीएफआर 3 से ज्यादा
भारत भूषण श्रीवास्तव @ सतना। विंध्य के तीन जिले सतना, रीवा और सीधी में जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम पूरी तरह से असफल साबित हो रहा है। तमाम कवायद के बाद भी नियंत्रण की स्थिति दिखाई नहीं दे रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर नजर डालें तो इन जिलों में हर महिला औसतन तीन बच्चे को जन्म दे रही है। यह जन्म दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। जबकि राज्य सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।
हर साल करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया जा रहा है। इसके बावजूद भी इन जिलों में टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) 3 से कम नहीं हो पा रहा है। खास बात यह है कि इन जिलों में सरकार द्वारा अतिरिक्त बजट देकर मिशन परिवार विकास का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। केवल सिंगरौली की स्थिति बेहतर है। पड़ोसी जिले पन्ना की स्थिति तो प्रदेश में सबसे ज्यादा खराब है।
यह है टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर)
18 से 49 साल तक की महिलाएं अपने जीवन में कितने बच्चों को जन्म देती हैं, इसी का आकलन टोटल फर्टिलिटी रेट में लगाया जाता है। टीएफआर 3 का मतलब है, एक महिला अपने जीवन में तीन बच्चों को जन्म दे रही है। सरकार की मंशा यह है कि एक महिला सिर्फ दो बच्चों को ही जन्म दे, तभी जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सकता है। सरकारी रेकॉर्ड के अनुसार, 1951 में राष्ट्रीय टीएफआर करीब 7 था। तबसे परिवार नियोजन कार्यक्रम चलाकर इसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश के 25 जिले
जनसंख्या नियंत्रण में केवल विंध्य के जिले असफल नहीं साबित हो रहे हैं। 25 जिले ऐसे हैं जहां टीएफआर तीन से ज्यादा है। इसमें शिवपुरी, विदिशा, छतरपुर, दमोह, सीहोर, डिंडोरी, गुना, रायसेन, उमरिया, सागर, कटनी, शाजापुर, टीकमगढ़, नरसिंहपुर, राजगढ़, रतलाम, मुरैना, खंडवा, खरगोन, झाबुआ व हरदा जिला शामिल हैं।
सबसे ज्यादा टीएफआर पन्ना में
टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) के आधार पर देखें तो सबसे खराब स्थिति पन्ना की है। जिले का टीएफआर प्रदेश में सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार पन्ना में टीएफआर 4.3, सतना में 3.7 है। रीवा व सीधी में एक समान स्थिति है। यहां टीएफआर 3.4 है।
यह किए जा रहे प्रयास
- परिवार नियोजन कार्यक्रम के लिए हर जिले को लगभग छह लाख रुपए तक राशि दी जाती है।
- परिवार नियोजन के साधन व गोलियां अस्पतालों को नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं।
- हर जिले में महिला नसबंदी पर 1400 रुपए व पुरुष नसबंदी पर 2000 रुपए दिए जा रहे।
- अधिक टीएफआर वाले जिलों में विशेष पैकेज दिया गया है। महिला नसबंदी पर 2000 व पुरुष नसबंदी पर 3000 रुपए तक दिए जा रहे हैं।
अभी भी जागरुकता की कमी
जिन जिलों में टोटल फर्टिलिटी रेट 2.1 से अधिक है, वहां जागरुकता की सबसे अधिक कमी सामने आई है। शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में लोग परिवार नियोजन अपनाने में पीछे हैं। पारिवारिक कारण व लगातार बेटियां होने पर बेटे की चाह भी इसका बड़ा कारण है। एक, दो या तीन लड़कियों के होने के बाद भी बेटा हो, इसलिए भी परिवार नियोजन को कम अपनाया जा रहा है। वहीं लोग ऑपरेशन से डरते हैं।