
सतना। आईडीबीआई बैंक की राजेंद्र नगर शाखा में मोटर दुर्घटना क्लेम से जुड़ी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की राशि ग्राहक की जानकारी के बिना समय से पहले निकाले जाने के मामले में अब जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है। कलेक्टर ने भारतीय रिजर्व बैंक के भोपाल स्थित क्षेत्रीय निदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और आईडीबीआई बैंक की कार्रवाई का ब्यौरा उपलब्ध कराने कहा है। पत्र में बैंक के ग्राहकों के साथ हुए फर्जीवाड़े का भी उल्लेख किया गया है। इन मामलों में अदालत के आदेश के विपरीत एफडी समय से पहले निकाले जाने का गंभीर मामला है। पत्रिका ने इस मामले को प्रमुखता से उजागर किया था। जिसके बाद अब बैंक की आंतरिक जांच और नियामकीय निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक को लिखे पत्र में पत्रिका द्वारा उजागर किए गए तीनों मामलों का उल्लेख किया है। आरबीआई से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आईडीबीआई बैंक ने नियामकीय नियमों के तहत अनियमितताओं की रिपोर्ट निर्धारित समय-सीमा में आरबीआई को दी थी या नहीं। यह भी पूछा है कि रिपोर्ट में संबंधित मामलों की विस्तृत आंतरिक जांच किये जाने का हवाला और विस्तृत रिपोर्ट शामिल थी या नहीं।
कलेक्टर ने आरबीआई को उंचेहरा तहसील के जिगनहट निवासी ममता पत्नी लल्लू लाल चौधरी, नागौद तहसील के महकोना गांव निवासी खुशीराम बागरी और अर्चना केवट के मामलों का हवाला दिया है। इन सभी की एफडी बिना उनकी जानकारी के तय समय सीमा के पहले निकाल ली गई गई।
कलेक्टर ने आरबीआई को बताया है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आईडीबीआई बैंक ने संबंधित कर्मचारियों को दूसरी शाखा या कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया है, लेकिन आंतरिक जांच और उसके बाद की कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में केवल कर्मचारियों का तबादला कर देना पर्याप्त कार्रवाई है या नहीं, यह भी जांच का विषय बन गया है।
कलेक्टर ने आरबीआई से मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इनमें कथित फ्रॉड की नियमानुसार रिपोर्टिंग, बैंक की विस्तृत आंतरिक जांच, ऐसी अन्य कितनी शिकायतें हैं और अदालत के आदेशों के विरुद्ध समय से पहले निकाली गई मोटर दुर्घटना क्लेम की एफडी की कुल संख्या कितनी है। कलेक्टर ने आरबीआई से स्वतंत्र जांच कराने और बैंक की जांच रिपोर्ट तथा उस पर की गई कार्रवाई का ब्योरा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
पत्रिका के खुलासे के बाद आईडीबीआई बैंक प्रबंधन जो मामले को दबाने में जुटा था अब बचाव की मुद्रा में आ गया है। सोमवार को आईडीबीआई बैंक के जीएम कलेक्टर से मिलने पहुंचे। कलेक्टर को बैंक में हुई घटनाओं की जानकारी दी। लेकिन कलेक्टर अभी उनकी सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। लिहाजा आरबीआई को पत्र लिखा है।