
Chitrakoot-Maihar master plan: ISRO की मदद से तैयार होगा हाईटेक मास्टर प्लान (फोटो सोर्स- Patrika)
Chitrakoot-Maihar master plan: विंध्य क्षेत्र के दो प्रमुख आस्था केंद्र धर्मनगरी चित्रकूट और अनुरूप शक्तिपीठ मैहर को भविष्य की आवश्यकताओं के आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए महायोजना पर काम तेज गति से शुरू हो गया है। अगले 20 से 25 वर्षों यानी वर्ष 2041 और 2047 की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान को एक साल के भीतर जमीनी धरातल पर लागू करने का लक्ष्य रखा है। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने इसके लिए व्यापक स्तर पर डेटा संकलन का मैदानी कार्य प्रारंभ कर दिया है।
धर्मनगरी के धार्मिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक स्वरूप को सहेजते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचे का खाका खींचने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसरो का राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र हैदराबाद इसके लिए हाई-रिजॉल्यूशन उपग्रह डेटा और सेटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराएगा। सेटेलाइट डेटा के प्राप्त होते ही जीआईएस मैपिंग के माध्यम से चित्रकूट और मैहर का सटीक बेस मैप तैयार किया जाएगा। इसके जरिए वर्तमान आवासीय, वाणिज्यिक, धार्मिक, नदी-पहाड़ और हरित क्षेत्रों का पारदर्शी डेटा जुटाया जाएगा। जीआईएस मैपिंग के बाद जमीनी सत्यापन कर अंतिम प्रारूप को आकार दिया जाएगा।
50% आवासीय क्षेत्रः भविष्य की रिहाइशी जरूरतों को पूरा करने के लिए। इसमें चौड़ी सड़कों का प्रावधान अनिवार्य रहेगा।
20% परिवहन व इंफ्रास्ट्रक्चरः बस स्टैंड, नए बाइपास मार्ग, पार्किंग स्थल और रिंग रोड का निर्माण।
10% कमर्शियल जोनः स्थानीय व्यापार, बाजार और धार्मिक पर्यटन को गति देने के लिए।
10% पब्लिक व सेमी-पब्लिकःसरकारी कार्यालय, अस्पताल, धर्मशालाएं, श्मशान घाट व जन-सुविधाएं।
10% ग्रीन एरियाः पर्यावरण संरक्षण के लिए सुरक्षित हरित क्षेत्र।
नए ड्राफ्ट में अमावस्या मेला, नवरात्र मेला, दीपावली मेला और साल भर आने वाले पर्यटकों की भीड़ को सुचारू रूप से संभालने के लिए स्पेस मैनेजमेंट किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मंदाकिनी नदी के संरक्षण, मजबूत ड्रेनेज सिस्टम और पर्यावरण-अनुकूल विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम न्यूनतम किया जा सके।
हाल के वर्षों में मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ और पर्व-त्योहारों पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित भीड़ ने नियोजन के लिए नई दिशा तय की है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय के अनुसार चित्रकूट में वर्तमान में वर्ष 2005 का मास्टर प्लान प्रभावी है। 2018-19 में बना ड्राफ्ट मैनुअल होने के कारण रोक दिया गया था और जीआईएस आधारित योजना के निर्देश दिए गए थे।
चित्रकूट विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन इस योजना के माध्यम से भू-उपयोग नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएंगे। भवनों के मानचित्र स्वीकृति में अब पर्याप्त पार्किंग, सड़क चौड़ीकरण के मानकों और फायर व भूकंप सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। मास्टर प्लान के साकार होने से न केवल तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और सुगम आवागमन मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और धार्मिक पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
डेटा संकलन तेजी से जारी है। सेटेलाइट इमेज आने के बाद कार्य और गति पकड़ेगा। पूर्व में अमृत योजना की गाइडलाइंस के चलते पुरानी योजना लागू नहीं हो सकी थी, लेकिन अब नवीनतम जीआईएस तकनीक का उपयोग कर एक पुख्ता और टिकाऊ मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।-नागेंद्र पेंड्रो, उप संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, सतना
Updated on:
05 Oct 2026 11:29 am
Published on:
05 Oct 2026 11:29 am
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