जमकर हुई नारेबाजी, प्रदेश सरकार की बताया असफलता
सतना। परसमनिया में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दुष्कृत्य की घटना के बाद जिले में राजनीति गरमा गई है। मंगलवार को कांगे्रस ने कलेक्ट्रेट का घेराव करते हुए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रदेश में बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंक कर अपना विरोध जताया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिलीप मिश्रा एवं शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर पहुंच कर जमकर नारेबाजी की। बलात्कार जैसे मामले में सख्त कानून के बाद भी क्रियान्वयन का अभाव बताते हुए अपराधियों के बेखौफ होने के पीछे सत्ता पक्ष को जिम्मेदार बताते हुए इस घटना को सरकार की असफलता बताया।
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और बाद में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पूर्व मंत्री सईद अहमद, पीसीसी सदस्य रवीन्द्र सिंह सेठी, प्रदेश महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष उर्मिला त्रिपाठी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुए प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने पीडि़ता के परिजनों को 25 लाख रुपए की आर्थिक मदद दिलाए जाने, उचेहरा पुलिस एवं परसमनिया पुलिस चौकी द्वारा कार्यवाही में देरी किए जाने के कारण उनपर कार्यवाही, जिला चिकित्सालय में एमएलसी फार्म के अभाव में इलाज में हुई देरी की जांच करा कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई। इस मामले की विशेष अदालत में सुनवाई कराकर आरोपी को फांसी की सजा दिलाए जाने की मांग की गई।
सत्ताधारी नेताओं का अवैध शराब कारोबार पर वरद हस्त
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने कहा कि जिले में चल रहे नशे के बड़े कारोबार एवं गांव-गांव में बिक रही अवैध शराब के कारण आपराधिक घटनाएं हो रहीं हैं। शराब के अवैध कारोबार सहित नशे के व्यवसाय के पीछे पुलिस और सत्ताधारी दल के नेताओं का संरक्षण है। इस पर तत्काल और सख्ती से अंकुश लगाने की बात कही। कहा, जैसे ही इस कारोबार पर अंकुश लगेगा इस तरह के अपराध अपने आप कम हो जाएंगे। शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद ने परसमनिया रेप घटना को प्रदेश सरकार के माथे पर कलंक बताया। कहा, मंदसौर की आंच ठंडी भी नहीं हुई थी इस घटना ने हर व्यक्ति को विचलित कर दिया है। उर्मिला त्रिपाठी ने कहा कि सख्त कानून नहीं उसके सख्ती से क्रियान्वयन पर ही अपराध रुकेंगे। अभी कमजोर क्रियान्वयन से अपराधियों में कानून का भय ही नहीं है। इस दौरान सुधीर सिंह तोमर, मिठाई लाल चौरसिया, पीडी पटेल, रमेश द्विवेदी, अजीत सिंह, अतुल सिंह परिहार, रामकुमार तिवारी, राजभान सिंह, राजदीप सिंह मोनू, लक्ष्मी सोनी, स्वतंत्र मिश्रा, संतोष पाण्डेय, देवेन्द्र तिवारी, अमित अवस्थी, राहुल सिंह, सलिल मिश्रा, अशोक पिंजानी, केके तिवारी, शांति सेन, हीरावती सेन, गुलाब सोनी आदि मौजूद रहे।
मंदसौर और सतना की घटना घिनौना कृत्य
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मंदसौर और सतना की घटना को घिनौना कृत्य करार देते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट हर जिले में बनाने की घोषणा तो उन्होंने निर्भया कांड 2012 के दौरान की थी। लेकिन अब वे सीजेआई को पत्र लिख रहे हैं। क्या प्रदेश में सभी जगह यह कोर्ट स्थापित हो गए हैं। बच्चियों और महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में भी मुख्यमंत्री सिर्फ शिगूफेबाजी करते हैं। जो बताता है कि घटनाओं पर रोकथाम से ज्यादा उनकी रूचि घटनाओं के समय अपने चेहरे पर लगी कालिख को छुपाना ही होता है। मंदसौर और सतना जैसी घटनाओं पर गंभीरता के साथ ठोस कदम उठाये जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2013 में उन्होने दूसरी बार 138 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किये जाने की बात कही थी तथा उत्पीडऩ के मामले में प्रतिदिन सुनवाई होने की जानकारी दी थी। अब मुख्यमंत्री बताएं कि क्या ऐसा वे पिछले 5 साल में कर पाए। अब मंदसौर और सतना घटना के बाद सीएम फिर शिगूफेबाजी करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कह दी। सवाल यह है कि पिछले चार साल में उन्होंने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया।