
सतना। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के स्पेशल मॉनिटर बालकृष्ण गोयल ने बुधवार को मैहर सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में व्यापक पैमाने पर अनियमितता, मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक प्रैक्टिस, गंदगी का साम्राज्य पाया। अस्पताल में मरीजों के साथ अनावश्यक और काफी संख्या में अटेंडर मौजूद पाए। इन सब मामलों में उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सिविल सर्जन अस्पताल में निरीक्षण के दौरान मौजूद नहीं रही।
जानकारी के अनुसार एनएचआरसी के स्पेशल मॉनिटर बालकृष्ण गोयल ने बुधवार को मैहर सिविल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान पाया कि यहां पर मरीजों को लगाए जाने वाले सिंगल यूज एंपुलबड़े पैमाने पर उपयोग करने के बाद दोबारा उपयोग करने के लिए रुई से ढंककर रखे गए थे। गोयल ने कहा कि यह तो चिकित्सा नियमों के विपरीत है। सिंगल यूज एंपुल को दोबारा यूज करने पर न केवल संक्रमण का खतरा रहा है बल्कि इससे दवा की सही डोज और असर भी प्रभावित होता है। यहां मौजूद चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में इस तरह की प्रैक्टिस नहीं की जाती है। पता नहीं आज कैसे यह यहां रह गए हैं। इस पर गोयल ने फटकार लगाते हुए कहा कि जिस तरीके से इन्हें रखा गया है उससे स्पष्ट है कि यहां इस तरह की नियमित प्रैक्टिस की जाती है और मरीज का इलाज तय प्रोटोकॉल के विपरीत किया जा रहा है।
अस्पताल के निरीक्षण में व्यापक पैमाने पर गंदगी पाई गई। जहां तहां कचरा और अवांछित सामग्री फैली मिली। डस्टबिन सही नहीं थे। ज्यादातर में ऊपरी ढक्कन नहीं थे। जिसकी वजह से मख्खियां यहां से संक्रमण फैला रही थी। चिकित्सक ने सफाई दी कि सफाई व्यवस्था आउट सोर्स में है। वो हमारी नहीं सुनता। इस पर गोयल ने फटकार लगाई। कहा कि यह प्रबंधन की जिम्मेदारी है।नहीं सुनता की बहानेबाजी मत करिए। अस्पताल के पीछे की ओर निरीक्षण में पाया गया कि यहां बडे पैमाने पर यूज्ड सिरींज, इंजेक्शन पड़े है। गोयल ने कहा कि यह तो हेजार्ड्स श्रेणी में आता है। इनका प्रापर डिस्पोजल का प्रोटोकॉल है। यहां कैसे फेंक रखा है। इसी तरह पोस्टमार्टम कक्ष में बड़े पैमाने पर गंदगी थी और काफी बायोवेस्ट पड़ा था। इस पर गहरी नाराजगी जताई। कहा, आप लोग तो बोल रहे थे कि इसका डेली उठान होता है फिर यहां कैसे यह सब पड़ा हुआ है?
मरीजों के वार्ड के निरीक्षण में पाया कि एक मरीज के साथ कई लोग मौजूद हैं, जबकि सिर्फ एक अटेंडेंट की अनुमति है। इस दौरान गोयल ने एक मरीज के साथ बैठी लोगों की जानकारी ली तो बताया गया कि ये मरीज की मां और मौसी है। गोयल ने नाराज होते हुए कहा कि भाभी को भी बुला लेते, मेला लगा लेते।चिकित्सकों से कहा कि इस पर ध्यान दीजिए। इनका कल आपरेशन होना है और इस तरह की भीड़ में संक्रमण का खतरा होगा। यहां सूचना पटल लगवाएं कि एक मरीज के साथ एक अटेंडेंट रहे। अस्पताल में कंपलेन रजिस्टर भी नहीं मिला।
गोयल ने जब अस्पताल की रसोई के निरीक्षण की बात कही बताया गया कि रसोई संचालक बंद करके चला गया है। इस पर कहा कि आप लोगों ने जानबूझ कर उसे भगा दिया है। वरना इस वक्त कैसे रसोई बंद रहेगी। सिविल सर्जन के भी मौजूद नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और रिपोर्ट में इसका उल्लेख करने कहा।
एनएचआरसी के स्पेशल मॉनिटर बालकृष्ण गोयल ने अमरपाटन के करही स्थित पीएमश्री का औचक निरीक्षण किया। विद्यालय में भवन की हालत खराब मिली। पीएमश्री स्कूल में बच्चों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वे नहीं मिल रही थीं। गोयल ने बच्चों से पीएम श्री का फुल फार्म पूछा तो वे नहीं बता पाए। इसके बाद शिक्षकों और प्राचार्य से यही सवाल किया तो वे भी नहीं बता पाए। जिस पर गोयल ने कहा कि आप लोग क्या ध्यान देते होंगे जब पीएमश्री का फुल फार्म ही पता नहीं है। फिर बताया कि पीएम श्री का फुल फार्म प्राइम मिनिस्टर स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया है। इसके पूर्व उन्होंने बेला आंगनबाड़ी का निरीक्षण किया। जहां बच्चों की उपस्थिति कम मिली और केन्द्र का रखरखाव उचित नहीं पाया गया।
वृद्धाश्रम के औचक निरीक्षण में भवन की स्थिति खस्ताहाल पाई गई। यहां के कर्मचारियों का पुलिस वैरीफिकेशन नहीं था। वृद्धों के बीच आए दिन होने वाले विवाद के निराकरण के लिए किसी प्रकार की काउंसिलिंग की व्यवस्था नहीं मिली। इनके भोजन में उपयोग होने वाले मसाले गुणवत्ताहीन और एक्सपायरी डेट के मिले। इस पर स्पेशल मॉनीटर ने रसोइया और वार्डन की जमकर क्लास लगाई।
एकलव्य विद्यालय के निरीक्षण में पाया गया कि यहां तय मापदंडों के विपरीत खाद्य सामग्री लोकल मार्केट से गुणवत्ताहीन लाई जा रही है। आधे से ज्यादा वाटरकूलर बंद पाए गए। यहां बच्चों को कभी भी पाक्सो एक्ट सहित गुट टच बैड टच की जानकारी नहीं दी गई। साइंस का सिलेबस काफी पीछे चलना पाया गया जबकि अर्धवार्षिक परीक्षाएं जल्द ही होने वाली हैं। यहां कैरियर काउंसिलिंग नहीं होना पाई गई। सबसे खतरनाक स्थिति यह रही कि बड़े पैमाने पर फिनायल छात्रावास में रखा मिला जबकि इसे स्टोर में होना चाहिए था। इसे लेकर गोयल ने सख्त आपत्ति ली और वार्डन की क्लास ली। यहां बच्चों का कान्फिडेंस काफी कमजोर मिला।
मैहर जेल में क्षमता से ज्यादा बंदी पाए गए। यहां स्टाफ के आवासीय परिसर की हालत काफी खराब थी। बंदियों के स्किल डेवलपमेंट की कोई कार्यवाही होना नहीं मिला। इसके बाद राशन दुकान की जांच में पाया गया कि नीचे पन्नी का इस्तेमाल नहीं होने से खाद्यान्न काफी खराब हो रहा है। गोयल ने निर्देश दिए कि एक वाट्सएप ग्रुप बनाएं जिसमें सर्वर खराब होने, राशन मिलने आदि की जानकारी प्रापर तरीके से लाभार्थियों को दी जाए।
स्पेशल मॉनीटर ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की है कि यहां मानवाधिकार के नाम से मिलती जुलती संस्थाएं चल रही हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि इस पर सख्ती से लगाम लगाएं।