
स्कूल वाले रास्ते पर प्रदर्शन करते छात्र (फोटो सोर्स: Patrika)
Satna News : 'हम पढ़ना चाहते हैं साहब! लेकिन हमारे स्कूल जाने का रास्ता ही बंद कर दिया गया है। अब हमें झूठे आश्वासनों का घूंट नहीं पीना है। हमें हमारी सड़क वापस चाहिए।' ये दर्द उन मासूम बच्चों का है जो सिर पर बस्ता टांगकर अपने हक की पढ़ाई के लिए गुहार लगाने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
मध्य प्रदेश के सतना जिले की रामपुर बाघेलान तहसील के करमऊ गांव (पाल बस्ती) से 16 मासूम बच्चे अपने अभिभावकों के साथ 30 किलोमीटर का सफर तय करके मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। यहां आयोजित जनसुनवाई में मासूम छात्रों ने कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा रखी।
बच्चों ने कलेक्टर के सामने आपबीती सुनाते हुए कहा कि, बीते 15 दिन से बारिश और दबंगों द्वारा 50 साल पुराने सार्वजनिक रास्ते पर धान की रोपाई कर रखी है, जिससे सेकूल जाने वाला संबंधित रास्ता दलदल बन चुका है। बस्ती के 50 से ज्यादा बच्चे 15 दिन से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार खसरा 324, 330, 331 और 334 से गुजरने वाला यह सार्वजनिक मार्ग रघुनाथपुर मुख्य मार्ग को जोड़ता है। आरोप है कि शासकीय भूमि पर पट्टेदारों ने अवैध कब्जा कर धान बो दिया है। मुख्य व्यवसाय पशुपालन होने से इसी रास्ते से रोज 500 मवेशी भी गुजरते हैं। बच्चों का दाखिला 4 से 9 किलोमीटर दूर रामनगर, गौरैया और बहौरी के स्कूलों में है, लेकिन रास्ता बंद होने से पढ़ाई ठप पड़ गई है।
10वीं की छात्रा लक्ष्मी पाल ने कहा, सितंबर में त्रैमासिक परीक्षाएं हैं। पढ़ाई पिछड़ रही है। छोटे बच्चों ने बताया कि कीचड़ के कारण वैन भी नहीं आ रही। ग्रामीणों ने कलेटर से मार्ग बहाल करने की मांग की है। बस्ती के रामचंद्र पाल ने चेतावनी दी कि ३ दिन में मार्ग चालू न होने पर 29 अगस्त को रघुनाथपुर मोड़ पर चकाजाम किया जाएगा।
Updated on:
26 Aug 2026 11:04 am
Published on:
26 Aug 2026 11:01 am
