सतना। मंदाकिनी के किनारे उतरती शाम, कामदगिरि की परिक्रमा और रामघाट पर गूंजती रामधुन... चित्रकूट में राम केवल आस्था नहीं हैं, बल्कि यहां की मिट्टी, पहाड़ और नदी में रचे-बसे हैं। इसी चित्रकूट से जुड़ा एक और नाम है, जिसने रामकथा को संस्कृत के विद्वानों की चौखट से निकालकर जन-जन की भाषा में पहुंचाया वो है गोस्वामी तुलसीदास।