छात्रा के लैपटॉप चलाने पर लगा बिजली चोरी का केस, जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान वापस करेगी लैपटॉप
सतना। अगर आप अतिगरीब परिवार से हैं और ईमानदारी से अपना बिल जमा करते हैं, ऐसे में अगर आपकी बेटी मेधावी छात्रा है और शिक्षा विभाग उसे लैपटॉप देता है तो उसे मत लीजिएगा। क्योंकि घर में उसका उपयोग करना विद्युत चोरी माना जाएगा। यह उस गरीब मां-बाप का कहना है जिसे बिजली विभाग ने बिजली चोरी का नोटिस महज इस लिये दे दिया क्योंकि जांच के वक्त घर में 87 प्रतिशत अंकों से उतीर्ण उनकी बेटी लैपटॉप में अपने नोट्स तैयार कर रही थी। यह हकीकत बिरसिंहपुर नगर पंचायत में रहने वाले अतिगरीब परिवार की है जिसका मुखिया नारायण अग्रवाल है। पति-पत्नी और चार बच्चों का परिवार बमुश्किल सब्जी बेचकर पालता है और घर खर्च चलाने के लिये पत्नी ऊषा अग्रवाल घर में सिलाई का काम करती है।
नारायण अग्रवाल ने कई साल पहले घरेलू कनेक्शन लिया था। जिसका बिल नियमित तौर पर भुगतान भी किया जाता है। नारायण की बेटी साक्षी 2016-17 में कन्या हायर सेकण्डरी स्कूल से 87 प्रतिशत अंकों के साथ हायर सेकण्डरी परीक्षा उत्तीर्ण की। जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा उसे लैपटाप खरीदने के लिये राशि दी। जिससे साक्षी ने अपने लिये लैपटॉप खरीदा और इसका उपयोग वह आगे की पढ़ाई में करने लगी।
यूं लगा बिजली चोरी का केस
साक्षी की मां ऊषा अग्रवाल ने बताया कि इस साल 24 जनवरी में उनके घर में बिजली विभाग के अफसर रतेले आए। उनके साथ एक पुलिस वाले भी थे। घर की जांच की। इस दौरान बेटी साक्षी लैपटॉप में अपने नोट्स तैयार कर रही थी। यह देख बिजली अफसर ने बिल मंगाया। जिसमें उस वक्त के नियमित जमा होने वाले बिल दिखाए गए। लेकिन बिजली अफसर यह कहने लगे कि एकल बत्ती में यह लैपटाप नहीं चला सकते। उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री की योजना के तहत मेधावी छात्रा को यह लैपटॉप मिला है। लेकिन बिजली अफसर नहीं माने। हालांकि वे कुछ देर बाद चले गए। इसके बाद फरवरी माह में 11 हजार रुपये का बिल भेज दिया और बिजली कनेक्शन को डीएल से सीएल (व्यावसायिक) कर दिया।
फिर घटाया बिल
साक्षी के पिता नारायण ने बताया कि बिजली अधिकारियों को सीएम के यहां से मिले चेक और लैपटाप की रसीद भी दिखाई। लेकिन कोई छूट नहीं मिली। इसके बाद फरवरी में 11 हजार का नोटिस वाला बिल भेज दिया। इतनी बड़ी राशि देख कर हालत खराब हो गई। फिर बिजली दफ्तर गए। उनके सामने रोए गिड़गिड़ाए। तब उन्होंने बोला जाओ देखते हैं। इसके बाद मई महीने में 11 हजार का बिल घटाकर 6899 का भेज दिया। अब इतनी राशि थोड़ी भर सकेंगे। बेहतर है सीएम को लैपटॉप ही वापस कर दें।
ट्यूशन पढ़ाती है साक्षी
साक्षी अब बीएससी सेकण्ड इयर में पढ़ रही है। अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिये वह घर में ही बच्चों को ट्यूशन ही पढ़ाती है। वह कहती है कि भाड़ में जाए मामा की ऐसी योजना जिसमें परिवार पर बिजली चोरी का आरोप लगे और चोरी का पैसा भरना पड़े। इस बार शिवराज जी आ रहे हैं जनआशीर्वाद यात्रा में। वहीं कार्यक्रम में लैपटॉप लौटा दूंगी।