
सतना। जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने के गंभीर मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को भेजी गई रिपोर्ट में साफ माना है कि यह घटना किसी एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे ब्लड ट्रांसफ्यूजन सिस्टम की विफलता का परिणाम है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच में पाया गया कि खून की जांच, दस्तावेजीकरण, निगरानी और ट्रेसबिलिटी व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं। साथ ही राज्य में एचआईवी जांच के लिए आवश्यक एनएटी (न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग) को एमओयू में शामिल नहीं किया गया था, जिससे जोखिम और बढ़ गया। उधर थैलेसीमिया पीडित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में रक्तादाओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स गठित की गई है।
147 रक्तदाताओं की तलाश, जांच के निर्देश
सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर संयुक्त टास्क फोर्स गठित की है, जिसे 147 ऐसे रक्तदाताओं की पहचान और जांच का जिम्मा दिया गया है, जिनका रिकॉर्ड अधूरा या सत्यापित नहीं था। इस प्रकरण में 196 रक्तदाताओं का रक्त थैलेसीमिया पीडित बच्चों को चढ़ाया गया था। जिसमें से 49 रक्तदाताओं को ट्रैक और टेस्ट किया जा चुका है। शेष 147 की जांच की जानी है। इसके लिए गठित टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ मनोज शुक्ला सीएमएचओ को बनाया गया है। सदस्यों में डॉ पूजा गुप्ता नोडल अधिकारी आईसीटीसी, डॉ अंकिता पांडेय ब्लड बैंक प्रभारी जिला अस्पताल, मोनल सिंह सहायक संचालक म.प्र. राज्य एड्स नियंत्रण समिति, प्रियंका चौबे औषधि निरीक्षक खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतना को शामिल किया गया है।
सभी ब्लड सेंटरों के लिए सख्त गाइडलाइन
आयोग को बताया गया है कि प्रदेश के सभी ब्लड सेंटरों को नई एसओपी जारी कर दी गई हैं, जिनमें डोनर रजिस्ट्रेशन, ट्रैकिंग और सुरक्षित रक्त आधान के कड़े प्रावधान शामिल हैं। साथ ही थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसे मरीजों की नियमित एचआईवी, एचबीवी और एससीवी जांच अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित बच्चों को मुफ्त इलाज और सहायता
जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि प्रभावित बच्चों को मुफ्त इलाज, शिक्षा सहायता, विकलांगता प्रमाण पत्र, आर्थिक मदद और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए। साथ ही परिवारों के लिए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन उपाय भी लागू किए जाएंगे।
नाट टेस्टिंग अब चरणबद्ध लागू
रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएटी (नाट) टेस्टिंग कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे लागू किया जा रहा है। वर्तमान में 24 जिलों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है और दूसरे चरण में पूरे प्रदेश में विस्तार किया जाएगा।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई
प्राथमिक जांच के आधार पर सतना जिला अस्पताल के ब्लड सेंटर प्रभारी, दो वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन और सिविल सर्जन को जिम्मेदार माना गया है। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा अस्पताल परिसर में अवैध रूप से रक्तदाताओं की व्यवस्था कराने और पैसे मांगने वाले गिरोह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू
केंद्र सरकार के ई-रक्तकोष प्लेटफॉर्म के जरिए प्रदेश के 188 ब्लड सेंटरों को जोड़ा गया है, जिससे ब्लड ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग को मजबूत किया जा सके।
आयोग ने मांगी थी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को बच्चों के जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। अब सरकार ने चार सप्ताह के भीतर सुधारात्मक कदमों और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कार्ययोजना प्रस्तुत की है।
Updated on:
05 May 2026 08:25 am
Published on:
05 May 2026 08:23 am
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