सवाई माधोपुर

घरों में कैद हैं आंगनबाड़ी केन्द्र

गंगापुरसिटी . महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से शहर में संचालित ज्यादातर आंगनबाड़ी केन्द्र घरों की चारदीवारी में कैद हैं। कई जगह केन्द्र ऐसी जगह संचालित हैं, जिनकी पहचान बेहद मुश्किल है। ऐसे में ज्यादातर केन्द्रों पर महज खानापूर्ति ही नजर आ रही है। आलम यह है कि केन्द्रों पर बच्चे भी गिने-चुने ही पहुंच रहे हैं। यदि बच्चों की संख्या बढ़ जाए तो इन्हें यहां बिठाना भी मुश्किल हो जाए। कई जगह स्वच्छ भारत मिशन को भी पलीता लगता नजर आया। वजह, यहां बच्चों को शौचालय की भी सुविधा नहीं है। कई केन्द्रों के हालात ऐसे मिले कि शायद ही कभी विभागीय अधिकारियों ने इन्हें देखा हो।
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घरों में कैद हैं आंगनबाड़ी केन्द्र

गंगापुरसिटी . महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से शहर में संचालित ज्यादातर आंगनबाड़ी केन्द्र घरों की चारदीवारी में कैद हैं। कई जगह केन्द्र ऐसी जगह संचालित हैं, जिनकी पहचान बेहद मुश्किल है। ऐसे में ज्यादातर केन्द्रों पर महज खानापूर्ति ही नजर आ रही है। आलम यह है कि केन्द्रों पर बच्चे भी गिने-चुने ही पहुंच रहे हैं। यदि बच्चों की संख्या बढ़ जाए तो इन्हें यहां बिठाना भी मुश्किल हो जाए। कई जगह स्वच्छ भारत मिशन को भी पलीता लगता नजर आया। वजह, यहां बच्चों को शौचालय की भी सुविधा नहीं है। कई केन्द्रों के हालात ऐसे मिले कि शायद ही कभी विभागीय अधिकारियों ने इन्हें देखा हो।


विभागीय मेहरबानी के चलते ज्यादातर केन्द्र मनमर्जी से संचालित हो रहे हैं। कई केन्द्र घरों के बिल्कुल अंदर के कमरों में संचालित हैं, जहां दीगर व्यक्ति पहुंच ही नहीं सके। पहचान के लिए लिखावट भी कहीं नजर नहीं आती। यूं तो आंगनबाड़ी केन्द्र किसी सरकारी बिल्डिंग या स्कूल में होने चाहिए, लेकिन जगह के अभाव में किराये पर कमरा लेकर इन्हें संचालित किया जा रहा है। शहर में ज्यादातर केन्द्र घरों में ही चल रहे हैं। केन्द्र पर कितना पोषाहार आ रहा है और वह कितना बंट रहा है। इसका लेखा-जोखा सिर्फ कागजों तक ही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि केन्द्रों पर बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रहती है। पोषाहार का वितरण भी मनमर्जी से होता प्रतीत हो रहा है। ऐसा लगता है कि विभाग ने पोषाहार की गुणवत्ता जांचने की जहमत ही नहीं उठाई है।


किराया वजह, लेकिन मशक्कत नहीं


विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केन्द्र को एक कमरे में संचालित करने के लिए साढ़े सात सौ रुपए प्रतिमाह किराया दिया जाता है। यदि बेहतर स्थान और सुविधायुक्त केन्द्र बनाना है तो उसके लिए पीडब्ल्यूडी के जेईएन से मौका वगैरह दिखाकर कागजी कार्रवाई की जाती है, जो ज्यादातर जगह नहीं हो पाती। यदि यह कागजी पूर्ति की जाए तो केन्द्र संचालन के लिए ढाई हजार रुपए की राशि मिल सकती है, लेकिन ज्यादातर जगह यह कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही। ऐसे में आंगनबाड़ी केन्द्र एक कमरे में ही सिमटकर रह गए हैं। खास बात यह है कि शहर में ७५० रुपए प्रतिमाह किराये पर कमरा मिलना मुश्किल है। ऐसे में ज्यादातर केन्द्र शहर के अंदरुनी हिस्से में है।


इस मामले में सीडीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग गंगापुरसिटी सत्यप्रकाश शुक्ला का कहना है कि फिलहाल केन्द्र संचालन के लिए साढ़े सात सौ रुपए दिए जाते हैं। ज्यादातर कार्मिक प्रोसिस को फॉलो करने में रुचि नहीं लेतीं। ऐसे में उन्हें ढाई हजार रुपए तक नहीं मिल पाते। यदि कहीं कोई कमी है तो उसे दुरुस्त कराने के प्रयास किए जाएंगे।

Published on:
22 Oct 2018 08:48 pm