
गंगापुरसिटी. नगर परिषद अपनी सीमा को तो विस्तार दे रही हैं, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही है। बात चाहे सड़कों की ही कर लें। विस्तारित कॉलोनियों की राहें गांवों जैसी है। कई रास्ते तो गांवों के रास्तों से भी बदतर हंै। ऐसे में बारिश के दौरान इन राहों से गुजरने में लोगों को परेशान होना पड़ता है। चौपहिया वाहनों में सवारियों को जहां हिचकोले लगते हैं, तो दुपहिया वाहन चालकों को फिसलकर गिरने की आशंका रहती है।
जमीन बेचने के कारोबार से जुड़े लोगों व नगर परिषद की ओर से बसाई गई कॉलोनियों में अधिकतर लोगों ने मकान बना लिए। ये मकान भव्य नजर आने से लगता है कि पॉश कॉलोनी होगी, लेकिन कॉलोनी में पहुंचते हैं तो वहां की राहें गांवों जैसी है। कच्ची राह में कीचड़ या फिर रेत अधिक मिलेगी। रात में बिजली गुल होने या बारिश के दौरान अंधेरे में सबसे अधिक परेशानी होती है। कई कीट, सर्प आदि भी रास्ते में आ जाते हैं। अंधेरे में किसी राहगीर के इन पर पैर रखने पर ये दंश भी सकते हैं।
नालियों का नहीं नामो-निशान
विस्तारित कॉलोनियों में नालियों का भी नामो निशान नहीं है। ऐसे में घरों से बहने वाला पानी रास्ते में बहकर आने से कीचड़ हो जाता है। कई घरों के सामने जहां रास्ते में गड्ढा या जमीन लेवल नीचा है, वहां पानी भर रहा है। इससे लोगों को घूमकर भी आना पड़ जाता है। रास्ते में जमा हो रहे घरों के पानी के बारे में कोई किसी से टोका-टाकी करता है तो झगड़ा होने की आशंका रहती है।
मिल रहा अतिक्रमण को बढ़ावा
नई विस्तारित कॉलोनियों के रास्तों में नगर परिषद की ओर से सड़कों का निर्माण नहीं कराए जाने से इनमें अतिक्रमण को बढ़ावा मिल रहा है। जिन लोगों ने मकान बना लिए, वे अपने मकानों के आगे गार्डन लगाकर या फिर निर्माण सामग्री डालकर अतिक्रमण करने में लगे हुए हैं। हालांकि अभी यह अस्थायी अतिक्रमण है, लेकिन लम्बा समय होने पर ये स्थायी का रूप ले लेगा। जिसे बाद में हटाने में नगर परिषद प्रशासन को भी मशक्कत करनी पड़ेगी। नगर परिषद की ओर से ताजा
हालातों में ही यदि विस्तारित कॉलोनियों के रास्तों में सीमाबंदी या सड़क का निर्माण करा दिया जाए तो इन कॉलोनियों की राहें खुली-खुली रहें।
हर दिशा में हो रहा विस्तार
नगर परिषद क्षेत्र का हर दिशा में विस्तार हुआ है तथा यह क्रम जारी है। जयपुर बायपास, जयपुर रोड, मिर्जापुर, उघाड़मल बालाजी क्षेत्र, करौली रोड, सालौदा, उदेईकलां की ओर कॉलेज रोड, रीको क्षेत्र आदि सभी क्षेत्रों में कई नई कॉलोनियां बस चुकी हैं। इनमें केवल बिजली की ही सुविधा है। इन कॉलोनियों की राहें कच्ची होने के साथ पेयजल पाइप लाइन का भी अभाव है।
बन रही तबेला
नई कॉलोनियों के मकानों में रहने वाले मवेशी पालन भी कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने रास्ते में घूड़ा डालकर तबेला बना रखा है। कई रास्तों में गोबर जमा कर रखा है। जिनसे मच्छर व मक्खियों के पनपने से मौसमी बीमारियों को भी बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है।