
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग की आंखों के सामने वन्यजीव नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। रणथम्भौर क्रिटिकल टाइगर हेबीटेट (सीटीएच) के अमरेश्वर एरिया में ऊंचाई पर स्थित आरटीडीसी के एक होटल पर चकाचौंध करने वाली रोशनी हो रही है। वहां पर न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए चारों तरफ रंग-बिरंगी विद्युतीय लाइटें लगी हैं। रात को वहां ठहरने वाले पर्यटकों के लिए नाच-गान का भी इंतजाम हो रहा है। वहां आए दिन ऐसे आयोजन होते हैं। आरटीडीसी का होटल होने के कारण राज्य सरकार से उसे जंगल में संचालन की अनुमति है। लेकिन नियमानुसार सीटीएच एरिया में रोशनी एवं शोरगुल पर पूर्णतया प्रतिबंध है। होटल प्रबंधन की ओर से भले ही न्यू ईयर सेलिब्रेशन करने वाले पर्यटकों को खुश करने के लिए ये इंतजाम किए जा रहे हों, लेकिन उनकी ओर से वन्यजीव नियमों से तो खिलवाड़ किया जा रहा है।जंगल में रहने वाले वन्यजीवों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वन विभाग भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।
वन विभाग की चौकी है, लेकिन रोक नहीं
चौंकाने वाली बात ये है कि जिस क्षेत्र में ये होटल है, वहां वन विभाग की चौकी भी बनी हुई है। वहां होकर ही होटल का रास्ता है। चौकी से होटल की रोशनी साफ दिखाई देती है, लेकिन वन विभाग को ये नजर नहीं आ रही है। उसकी ओर से कोई रोक नहीं लगाई गई है।
क्या कहतें है एक्सपर्ट
स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य धर्मेन्द्र खांडल ने बताया कि रंग-बिरंगी रोशनी से वन्यजीव विचलित होते हैं। झूमर बावड़ी एवं अमरेश्वर एरिया में बाघ-बाघिनों का मूवमेंट भी है। होटल के खुले परिसर में कैम्प फायर के दौरान लंगा पार्टियों के ढोलक, मंजीरे आदि बजाने से वे डिस्टर्ब होते हैं। कई पक्षी जैसे नाइट जार, उल्लू आदि हैं, जो रात को ही विचरण करते हैं। शांत वातावरण एवं अंधेरा रहना भी प्राकृतिक दृष्टिकोण से वन्यजीवों के लिए जरूरी है।
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन अगर सीटीएच एरिया में लाइटिंग व शोरगुल हो रहा तो इस बारे में कार्रवाई की जाएगी। ऐसी गतिविधियों का बंद कराया जाएगा।
जीवी रेड्डी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जयपुर
रोशनी हर साल की जाती है। म्यूजिक को कम आवाज में बजाने के लिए निर्देश दिए जाएंगे।
राजकुमार, प्रभारी, आरटीडीसी, सवाईमाधेापुर