
गंगापुरसिटी. आर्य समाज भगवती नगर के तत्वावधान में विजय पैलेस में चल रहे यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में शनिवार को आचार्य शिवकुमार शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के दु:खों का कारण जन्म, प्रवृति, दोष, एवं अशिक्षा है। अशिक्षा के कारण मनुष्य सही-गलत में भेद नहीं कर पाता और जड़ को चेतन एवं चेतन को जड़ समझने की भूल करता है।
शास्त्री ने कहा कि वेदों के पठन एवं श्रवण से ज्ञान की प्राप्ति होती है। महर्षि दयानन्द, गुरुदेव विरजानन्द एवं गौत्तम बुद्ध के जीवन में आए परिवर्तन का मूल दुख ही है। विषय भोगों में लिप्त मनुष्य क्षणिक दुख में ही टूटकर बिखर जाता है। उन्होंने धर्म की परिभाषा बताते हुए कहा कि धर्म वह है, जिसे धारण किया जा सके एवं निर्विरोध सभी स्वीकार कर सकें। आचार्या सरस्वती देवी ने चापलूस एवं आलोचक की व्याख्या करते हुए कहा कि दोनों में मौलिक अंतर है।
चापलूस व्यक्ति हमेशा कमियों को विशेषता बताता है, जबकि आलोचक कमियां निकाल कर सुधार करने का मौका देता है। प्रचार मंत्री ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि यज्ञ ब्रह्मा ने यज्ञ कार्य कराया। ब्रह्मचारणियों ने आध्यात्मिक एवं देशप्रेम से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। गुप्ता ने बताया कि रविवार को महायज्ञ में पूर्णाहूति देकर ऋषि लंगर का आयोजन किया जाएगा। साथ ही आचार्य, ब्रह्म एवं ब्रह्मचारणियों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम मेंं रविन्द्र कुमार खुंटेटा, भूपेन्द्र, पूनम पटवारी, मुकेश, हनुमान प्रसाद गोयल, कैलाशचन्द खूंटेटा, शम्भुदयाल, विनोद खण्डेलवाल, भविष्य कुमार, कैलाशचन्द हलवाई, गोविन्द नारायण, राकेश कुमार, रामावतार सीए, रमेशचन्द एवं गोविन्द सहाय यजमान के रूप में मौजूद रहे।