
- यह कैसा बेटियों का मान
गंगापुरसिटी . प्रदेश में तालीम के दम पर अपनी पहचान कायम करने वाले गंगापुरसिटी में यूं तो स्कूल-कॉलेज एवं कोचिंगों की भरमार है, लेकिन बेटियों की सरकारी तालीम को लेकर सरकार कभी फिक्रमंद नजर नहीं आई। ऐसे में यहां ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ वाली कहावत खूब चरितार्थ होती नजर आ रही है। गंगापुरसिटी में अभी तक बेटियों के लिए अलग से कन्या महाविद्यालय नहीं है। ऐसे में बेटियां यहां लडक़ों के साथ ही शिक्षा हासिल कर रही हैं।
सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में बड़ी-बड़ी बातें सुनने को मिलती हैं और बेटियों का मान बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन असल में यह कहीं नजर नहीं आते। कहने को तो इस शिक्षा नगरी में बहुतेरे स्कूल-कॉलेज हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर बेटियों को बेहतर शिक्षा के इंतजाम नाकाफी नजर आते हैं। कई मर्तबा इसको लेकर आवाज भी उठी है, लेकिन यह कभी अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है। यही वजह है कि गंगापुर शहर सहित आसपास के क्षेत्र की बेटियां अब भी निजी महाविद्यालयों में पढ़ाई करने को विवश हैं। जनप्रतिनिधियों ने कन्या महाविद्यालय खुलवाने की घोषणा कई बार की है, लेकिन नतीजा अब तक सिफर ही रहा है।
बातों में बेटियां, धरातल पर नहीं पहल
बात जनप्रतिनिधियों की हो या अफसरों की। बेटियों को बढ़ावा देने की बात करने में किसी से कसर नहीं छोड़ी है। हाल ही में मिनी सचिवालय में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को लेकर अभिनव पहल हुई। मिनी सचिवालय में बेटियों को समर्पित मूर्ति का अनावरण किया गया। इसमें जनप्रतिनिधि एवं अफसरों ने जोर-शोर से बेटियों को आगे बढ़ाने और उनका सम्मान करने की नसीहत दी, लेकिन अफसोस की बात की है कि बेटियों के लिए शहर में अब तक सरकारी महाविद्यालय की मांग पूरी नहीं हो सकी है।
मोटी फीस देकर पढ़ाई को विवश
शिक्षा की नगरी गंगापुरसिटी में राजकीय महाविद्यालय नहीं होने के कारण शहर सहित आसपास के गांवों की बेटियों को निजी कॉलेजों में मोटी फीस देकर अपनी पढ़ाई करनी पड़ रही है। कई बार लोगों ने बेटियों की सहूलियत और महंगी फीस से निजात पाने के लिए गंगापुरसिटी उपखंड मुख्यालय पर निजी कन्या महाविद्यालय खोलने की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं हो सकी है।