Ranthambore :रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-2307 ने तीन शावकों को जन्म दिया है।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-2307 ने तीन शावकों को जन्म दिया है। लंबे समय से वन्यजीव प्रेमियों को जिस पल का इंतजार था, वह अब पूरा हो गया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से की है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कुछ दिन पहले कुंडेरा रेंज में नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों ने बाघिन टी-2307 को तीन शावकों के साथ देखा था। हालांकि उस समय दूर से झलक मिलने के कारण फोटो या वीडियो नहीं लिया जा सका, इसलिए औपचारिक पुष्टि नहीं हो सकी। बाद में वन मंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीरों ने इसकी पुष्टि कर दी कि रणथंभौर में बाघों का परिवार एक बार फिर बढ़ गया है।
बाघिन टी-2307 की उम्र करीब चार वर्ष बताई जा रही है। यह मशहूर बाघिन टी-111 और बाघ टी-121 की बेटी है। विशेषज्ञों के मुताबिक चार साल की उम्र में पहली बार मां बनना बाघिन के स्वास्थ्य और क्षेत्रीय सुरक्षा का मजबूत संकेत माना जाता है। वन विभाग का कहना है कि शावकों की संख्या और बाघिन की स्थिति से यह साफ है कि उसकी टेरेटरी सुरक्षित है और भोजन की उपलब्धता पर्याप्त है।
इस बार टी-2307 ने पहली बार शावकों को जन्म दिया है। घटना के बाद से वन विभाग ने बाघिन की सुरक्षा और देखरेख को बढ़ा दिया है। उसकी मूवमेंट कुंडेरा रेंज के बावड़ी तिराहा, बैरदा और लाहपुर सेल क्षेत्र में देखी जा रही है। यही इलाका अब शावकों का नया होम रेंज बनेगा, जब तक वे खुद शिकार सीखने की उम्र तक नहीं पहुंच जाते।
शावकों की मौजूदगी के बाद से विभाग ने क्षेत्र में गतिविधियां सीमित कर दी हैं और गश्त बढ़ा दी है। बाघों के परिवार को किसी भी तरह की मानवीय हस्तक्षेप या खतरे से बचाने के लिए कैमरा ट्रैप, ट्रैकिंग और ग्राउंड पेट्रोलिंग को तेज किया गया है।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर लैंडस्केप्स में से एक है।