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सवाईमाधोपुर। खेतों में सरसों की फसल पककर सुनहरी लहरों की तरह लहलहा रही है, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं। तैयार फसल सामने खड़ी है, मगर मजदूरों की भारी कमी और मौसम का पल-पल बदलता मिज़ाज किसानों की उम्मीदों पर भारी पड़ रहा है। मुंहमांगे दाम देने के बावजूद श्रमिक नहीं मिल रहे, और आसमान में मंडराते बादल किसानों के दिल की धड़कनें तेज कर रहे हैं।
अगर समय पर कटाई न हुई तो महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिर सकता है। जिले में इस बार एक लाख 51 हजार194 हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई हुई है। सरसों की फसल पककर तेयार है, लेकिन फसल कटाई के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे, ऐसे में कई किसान मजबूर होकर मध्यप्रदेश से मजदूर बुला रहे हैं।
मौसम का पल-पल बदलता मिज़ाज किसानों की बेचैनी और बढ़ा रहा है। उन्हें डर है कि अगर बारिश या ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचा दिया तो महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिर जाएगा। यही कारण है कि किसान मजदूरों को मुंहमांगे दाम देकर भी खेतों में उतार रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों रबी सीजन की प्रमुख नकदी फसल है। इसकी कटाई समय पर न हो तो फलियों से दाने झड़ जाते हैं, जिससे उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। क्षेत्र में अंग्रेजी सरसों की कटाई पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन बारिश और खराब मौसम ने काम रोक दिया। अब मौसम साफ होते ही खेतों में फिर से तेजी आई है और दिनभर श्रमिक कटाई में जुटे हैं।
इसी बीच खेतों में गेहूं की फसल भी लहलहा रही है। अगेती गेहूं में बालियां बन चुकी हैं, जबकि पछेती फसल में बालियां निकलना शुरू हुई हैं। किसानों का कहना है कि हाल की बारिश और तेज हवा से कई जगह गेहूं झुक गई है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि वे किसी भी हाल में सरसों की तैयार फसल को जोखिम में नहीं डालना चाहते। यही कारण है कि वे हर संभव मजदूरों की व्यवस्था कर रहे हैं। श्रमिकों के लिए यह अतिरिक्त कमाई का मौका बन गया है, लेकिन किसानों के लिए यह मजबूरी है। उनका कहना है कि मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कटाई कार्य में तेजी बेहद जरूरी है, वरना खड़ी फसल में नुकसान तय है।
मजदूरों की भारी कमी और मौसम का पल-पल बदलता मिज़ाज किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना है। कटाई का काम जारी है, मगर बीच-बीच में खराब मौसम ने रफ्तार रोक दी। मजदूर नहीं मिलने से किसान मजबूर होकर मध्यप्रदेश से श्रमिक बुला रहे हैं। लेकिन बाहर से मजदूर लाना बेहद महंगा पड़ रहा है।
फसल कटाई के लिए दूसरे गांव से मजदूर लाने पड़ रहे हैं और 500 रुपए देने पर भी मजदूर नहीं मिल रहे। मजदूरों की मांग इतनी बढ़ गई है कि मुंहमांगे दाम देने के बावजूद श्रमिक आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे। इससे कटाई का काम प्रभावित हो रहा है। मौसम का पल-पल बदलता मिज़ाज किसानों की चिंता और बढ़ा रहा है। उन्हें डर है कि अगर बारिश या तेज हवा ने फसल को नुकसान पहुंचा दिया तो महीनों की मेहनत और लागत पर पानी फिर जाएगा।
Published on:
24 Feb 2026 05:23 pm
