
भगवतगढ़. एक ओर सरकार प्राथमिक कक्षाओं में पढऩे वाले बच्चों के शैक्षिक स्तर को सुधारने के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय है, जिनमें मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसा ही उदाहरण ग्राम पंचायत भगवतगढ़ के गांव टोरडा में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का है। विद्यालय में पिछले दो वर्ष से पेयजल की समस्या बनी हुई है। इस बारे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक देवेंद्र बढाया ने शिक्षा विभाग, जलदाय विभाग, जिला कलक्टर, पंचायत समिति के अधिकारियों एवं ग्राम पंचायत सरपंच सहित सभी को अवगत करा दिया। इसके बावजूद भी अब तक समस्या का हल नहीं हो पाया है। इससे स्कूल के बच्चों, स्टाफ सदस्यों एवं पोषाहार बनाने वाली कुक कम हेल्पर को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय के बोर में दो वर्ष पूर्व बोरिंग की मोटर खराब होने से पेयजल की समस्या हो गई। इसके बाद कुछ माह बाद ग्राम पंचायत द्वारा नई मोटर उपलब्ध कराई गई। ग्रामीणों ने जब नई मोटर को बोरिंग में डाला तो बोरिंग में मिट्टी भर जाने के कारण मोटर जल स्तर तक नहीं पहुंच पाई। इससे समस्या जस की तस बनी रही। इसके बाद प्रधानाध्यापक ने कई बार बोरिंग को सुधरवाने अथवा नया बोर कराने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों एवं जलदाय विभाग के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।
तत्कालीन जिला कलक्टर को जिला परिषद सदस्य सुनीता तिलकर ने अवगत कराया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानाध्यापक ने बताया कि पेयजल समस्या से विद्यालय का नामांकन भी प्रभावित हुआ है। वहीं बच्चों के बार-बार पानी पीने के लिए घर जाने से पढ़ाई भी बाधित हो रही है। प्रधानाध्यापक एवं अभिभावकों ने जिला कलक्टर से समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की।