सवाई माधोपुर

करोड़ों की आय के लिए वन्यजीवों की सेहत से हो रहा खिलवाड़, विचलित होकर जंगल से बाहर आ रहे बाघ

फुल डे- हाफ डे सफारी बंद करने की मांग पकडऩे लगी जोर, करोड़ों की आय के लिए वन्यजीवों की सेहत से हो रहा खिलवाड़, विचलित होकर जंगल से बाहर आ रहे बाघ
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सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में एक ओर तो एनटीसीए की गाइडलाइन का हवाला देेकर वाहनों की संख्या को निर्धारित कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर फुल डे-हाफ डे सफारी के नाम पर बाघों की सेहत से खिलावड़ लगातार जारी है। लम्बे समय से वन्यजीव प्रेमियों के द्वारा फुल डे हॉफ डे सफारी को बंद करने की मांग की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी फुलडे हाफ डे सफारी से होनी वाली मोटी आय के चलते वन विभाग व सरकार ने आंखे मूंद रखी है। वहीं इस संबंध में वन अधिकारियों का कहना है कि फुल डे हाफ डे सफारी को लेकर कुछ ईशु है। इस संबंध में फैसला सरकार को लेना है हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई फैसला नहीं किया गया है।



विचलित होकर बाहर आ रहे बाघ

फुल डे हाफ डे सफारी में दिन भर बाघों को पर्यटक वाहन घेरे रहते हैं। इससे वन्यजीवों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार दोपहर में बाघों व अन्य वन्यजीवों के आराम का समय होता है, लेकिन इस दौरान भी पर्यटक वाहन बाघों को घेरे रहते हैं। इससे वन्यजीव डिस्टर्ब हो रहे हैं। ऐसे में बाघ जंगल से बाहर आ रहे हैं। पूर्व में जंगल से निकलकर टी-28 बाघ छाण के खेतों में आ गया था, जहां ट्रेंकुलाइज करते समय बाघ की मौत हो गई थी।



कई बार सौंपा ज्ञापन

रणथम्भौर में $फुल डे हाफ डे सफारी को बंद करने की मांग लम्बे समय से उठ रही है। अब तो रणथम्भौर में पर्यटन से जुड़े लोग ही फुल डे हाफ डे सफारी को बंद करने की मांग करने लगे हैं। रणथम्भौर व्हीकल ऑनर्स यूनियन, बाघ संरक्षण ग्रामीण विकास समिति, पथिक लोक सेवा समिति आदि सामाजिक संगठनों की ओर से कई बार जिला कलक्टर व विधायक के माध्यम से वन मंत्री व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा पूर्व में रणथम्भौर की स्टैण्डिंग कमेटी की पूर्व सदस्य अंजना गोसाई भी खुलेआम फुल डे हाफ डे सफारी का विरोध कर चुकी है।



तीन साल में कमाए दस करोड़

वन विभाग की ओर से 2016 में फुल डे हाफ डे सफारी की शुरुआत की गई थी। इसमें केवल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर व वाइल्ड लाइफ फिल्म मेकर को ही भ्रमण पर जाने की अनुमति थी, लेकिन बाद में इसका दुरुपयोग शुरू हुआ और होटेलियर्स ने इसे बड़ा व्यापार बना कर रख दिया। वहीं वन विभाग को भी फुल डे हाफ डे सफारी से करीब दस करोड़ की आय हुई है। इस पर्यटन सत्र में विभाग को 3.73 करोड़ की आय हुई है।

Published on:
04 Jul 2019 06:00 am
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