कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह के बाद इसरो संचार उपग्रह का प्रक्षेपण भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) से करेगा।
बेंगलूरु. नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-१एच प्रक्षेपण में मिली विफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) दूर संवेदी कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह का प्रक्षेपण करने की तैयारी कर रहा है। कई देशों के 30 नैनो उपग्रहों के साथ कार्टोसैट का प्रक्षेपण दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े में किया जाएगा। इसके बाद इसरो कई और उपग्रहों का प्रक्षेपण पीएसएलवी एवं जीएसएलवी के जरिए करेगा।
कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह के बाद इसरो संचार उपग्रह का प्रक्षेपण भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) से करेगा। इसके लिए श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दोनों लांच पैड पर तैयारियां चल रही हैं। दिसम्बर में छोड़ा जाने वाला कार्टोसैट-2 श्रृंखला का उपग्रह अंतरिक्ष में भारत की छठी आंख बनेगा। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक के. सिवन ने कहा है कि दिसम्बर के बाद इसरो एक के बाद एक कई उपग्रहों का प्रक्षेपण करेगा।
इसरो इसे 30 नैनो उपग्रहों के साथ छोडऩे की योजना बना रहा है। प्रक्षेपण दिसम्बर के दूसरे पखवाड़े में होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह के तुरंत बाद नौवहन उपग्रह का प्रक्षेपण होगा। यह नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1 आई होगा जो खराब पड़े आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा। इससे पहले आईआरएनएसएस-1ए के स्थानापन्न के तौर पर भेजे गए आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण नाकाम रहा था। ये दोनों उपग्रह श्रीहरिकोटा स्थित पहले लांच से छोड़े जाएंगे क्योंकि दूसरे लांच पैड पर जीएसएलवी मार्क-3 के प्रक्षेपण की
तैयारियां चल रही हैं। इसके अलावा दूसरे लांच पैड से ही चंद्रयान-2 छोड़ा जाएगा जिसके लिए मार्च 2018 का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कारणवश कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह के प्रक्षेपण में देरी हुई तो नौवहन उपग्रह के प्रक्षेपण में भी देरी होगी क्योंकि दोनों उपग्रह एक के बाद एक पहले लांचपैड से ही छोड़े जाएंगे।
सभी रॉकेटों में कई सुधार
चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण पीएसएलवी से किया गया था लेकिन लैंडर, रोवर और आर्बिटर वाला चंद्रयान-2 मिशन 3250 किलोग्राम वजनी है और इसे जीएसएलवी मार्क-2 से छोड़ा जाएगा। सिवन ने कहा कि पीएसएलवी सी-39 /आईआरएनएसएस-1एच मिशन के प्रक्षेपण में मिली नाकामी के बाद सभी रॉकेटों में कई सुधार किए गए हैं। वहीं
पीएसएलवी सी-39 मिशन के विफलता के कारणों की जांच अभी चल रही है।
प्राथमिक जांच से यह पता चला है कि पायरो तत्वों में विसंगति के कारण ही रॉकेट का हीट शील्ड नहीं खुला। गौरतलब है कि दिसम्बर में छोड़ा जाने वाला कार्टोसैट-2 श्रृंखला उपग्रह एक अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह है जिसने देश की निगरानी एवं टोही क्षमता बढ़ाई है। ये उपग्रह उच्च रिजोल्यूशन मल्टी स्पेक्ट्रल उपकरणों और पैंक्रोमेटिक कैमरा से युक्त है। ये उपग्रह 0.65 मीटर रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें उतारने में सक्षम हैं। कार्टोसैट सैन्य बलों को एरिया ऑफ इंट्रेस्ट
पर आधारित तस्वीरें भी प्रदान करता है। इन उपग्रहों के जरिए धरती हर कोने पर नजर रखी जा सकती है।