विज्ञान और टेक्नोलॉजी

‘बुलेट प्रूफ जैकेट’ वाली अनोखी मछली आई सामने, वैज्ञानिकों ने कहा- ‘इसके हैं बड़े फायदे’

ताज़े पानी में पलने वाली ये मछली खुद को बचाने के लिए एक बुलेट प्रूफ जैकेट बना लेती है कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के सैन डिएगो और बेर्कले कैम्पस के शोधकर्ताओं ने मिलकर इसकी खोज की है

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Oct 18, 2019

नई दिल्ली। प्रकृति कितनी धनि है इस बात का अंदाज़ा आप इस अनोखी मछली से लगा सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि ताज़े पानी में पलने वाली ये मछली खुद को बचाने के लिए एक बुलेट प्रूफ जैकेट बना लेती है। ये मछली एक खतरनाक मछली 'पिरहाना' से खुद को बचाने के लिए वो बुलेट प्रूफ हो जाती है। बीते कुछ दिनों पहले ही इस मछली के बारे में पता चला है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के सैन डिएगो और बेर्कले कैम्पस के शोधकर्ताओं ने मिलकर इसकी खोज की है। उनका कहना है कि दुनिया में ताजे पानी की सबसे बड़े जलस्रोत ( Amazon River basin ) में मिलने वाली मछलियों की सुरक्षा के लिए उनके शरीर पर प्राकृतिक रूप से "बुलेट प्रूफ जैकेट" जैसे मजबूत खाल बन जाती है। इसके इस्तेमाल से वे अपने आस-पास के खतरों से बच पाती हैं।

इस मछली को पिरारुकु या अरापाइमा गिगास ना दिया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मछली की खोज के बाद इंसानों के लिए भी एक बढ़िया बुलेट प्रूफ कवच बनाने के लिए बेहतर काम किया जा सकता है। इसके साथ ही एयरोस्पेस भी बनाने में वैज्ञानिकों को मदद मिल सकती है। पिरारुकु मछली का वजन 200 किलो तक का हो सकता है साथ की इसकी लंबाई 10 फीट तक होती है। इसकी बाकि खूबियों के बारे में आप जानकर हैरान रह जाएंगे। ये मछली मुसलसल हवा में सांस ले सकती है साथ ही पूरा एक दिन बड़े आराम से पानी के बहार गुज़ार सकती है।

पिरारुकु घर ब्राजील, गुयाना और पेरू में पाई जाती हैं ये वो जगहें हैं जहां रेजर जैसी धार वाले दांत वाली पिरहाना पाई जाती है। बस इन्हीं से बचने के लिए इन मछलियों ने खुद को इस रूप में ढाल लिया ही। शोधकर्ताओं को परिक्षण में पता चला कि इन मछलियों के शल्क की बाहरी परत खनिजों से बनी है जिसे भेदना मुश्किल है जबकि अंदरूनी हिस्सा कोलैजन से बना है।

Published on:
18 Oct 2019 11:06 am
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