विज्ञान और टेक्नोलॉजी

डायनोसोरों से जुड़े हैं ऑस्ट्रेलिया के ये पेड़

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग ने करोड़ो जीव-जंतुओं और लाखों हेक्टेयर में फैले जंगल को राख में बदल दिया है। इस क्षेत्र में मौजूद बलुआ पत्थरों के पठार (सैंडस्टोन प्लेटो) पर मौजूद एक बेहद खास और गुप्त जगह पर हाल ही कुछ वैज्ञानिक पहुंचे। उनका उद्देश्य यहां मौजूद इन विशेष पेड़ों को आग से बचाना था। इसे ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने एक अभूतपूर्व पर्यावरण संरक्षण मिशन कहा।
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Updated: 25 Jan 2020, 9:09 PM IST
डायनोसोरों से जुड़े हैं  ऑस्ट्रेलिया  के ये पेड़
डायनोसोरों से जुड़े हैं ऑस्ट्रेलिया के ये पेड़

दरअसल, सिडनी के उत्तर-पश्चिम में लगभग 125 मील (201 किमी) की दूरी पर जंगली 'वोलेमी पाइंस' नाम के पेड़ों की एक प्रागैतिहासिक प्रजातियां हैं। वैज्ञानिक इन्हीं पेड़ों के संरक्षण के लिए यहां आए थे। इन पेड़ों को पृथ्वी पर मौजूद डायनासोर के समय के कुछ अंतिम जीवित साक्ष्यों में से एक माना जाता है। अब यहां 200 से भी कम पेड़ बचे हैं। वॉलेमी नेशनल पार्क में मौजूद डायनोसोर युग के इन प्राचीन पेड़ों को आग और अन्य खतरों से संरक्षित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने युद्धस्तर पर अभियान चलाया हुआ है। ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्राइस ब्रैक ने कहा कि इन पेड़ों को 'डायनोसोर पेड़', 'समय-यात्रा करने वाला क्लोन' और 'प्रकृति का सिडनी ओपेरा' जैसी संज्ञाएं मिली हुई हैं। इनका नष्ट होना पूरी दुनिया के लिए बड़ी त्रासदी होगी। यह एक प्रकार का शंकुवृक्ष है जो दक्षिणी गोलार्ध में के पेड़ों से मिलता-जुलता है। इनकी अधिकतम ऊंचाई 130 फीट तक हो सकती है।

अधिकांश पौधों की प्रजातियों में ऐसे जीन होते हैंए जो एक पौधे से दूसरे पौधे में अलग होते हैं। लेकिन वोलेमी पाइन पेड़ आनुवंशिक रूप से एकसमान है, जिनमें से कुछ तो यहां डायनासोर के समय से मौजूद हैं। ६ करोड़ साल पहले ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में यह पेड़ 'वोल्लेमिया नोबिलिस बेहद आम पेड़ थे। लेकिन ३ करोड़ साल पहले जब महाद्वीप एक-दूसरे से अलग हुए तो उत्तर दिशा की ओर खिसकने के कारण महाद्वीप सूख गया और ये पेड़ लुप्त होने लगे।

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