
स्मार्ट टेक्नोलॉजी (Representational Photo)
स्मार्ट लॉक, डिजिटल गेट, ऐप से खुलने वाली कार, और फेस आईडी जैसी स्मार्ट टेक्नोलॉजी (Smart Technologies) ने हमारे जीवन को पहले से कहीं ज़्यादा आसान तो बना दिया है, लेकिन इमरजेंसी (Emergency) की स्थिति में बिजली, बैटरी, नेटवर्क, सर्वर या खुद डिवाइस के फेल होने पर ये सुविधाएं कई बार बड़े संकट में डाल देती हैं। कल्पना कीजिए, घर में कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए। बाहर मदद के लिए लोग खड़े हों, लेकिन स्मार्ट लॉक का पासवर्ड सिर्फ उसी व्यक्ति को पता हो जो बेहोश हुआ है। अस्पताल ले जाने के लिए कार सामने खड़ी हो, लेकिन वो मोबाइल ऐप से ही खुलेगी और फोन की बैटरी खत्म हो चुकी हो। ऐसे में कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ सकती है। इसी तरह अग्नि हादसों में कई बार देखा गया है कि एहतियात के तौर पर घर की बिजली काटने पर इलेक्ट्रॉनिक लॉक निष्क्रिय हो गए और ऑटोमेटेड गेट जाम हो गए। ऐसे हादसों में एक-एक सेकंड कीमती रहता है।
पिछले कुछ वर्षों में जयपुर, दिल्ली, लखनऊ आदि शहरों में ऐसे हादसे हो चुके हैं। सवाल यह है कि क्या सहूलियत के लिए बनाई जा रही स्मार्ट टेक्नोलॉजी इमरजेंसी के लिए तैयार हैं? होम सेफ्टी एक्सपर्टं अमित आचार्य का कहना है कि ऐसे डिजिटल सेफ्टी डिवाइसेज़ पर पूरी तरह निर्भर न रहें। हर स्मार्ट डिवाइस का एक फिज़िकल या मैकेनिकल बैकअप (चाबी आदि) हमेशा चालू हालात में रखें।
हाल ही देश के कई शहरों से ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए, जहाँ ब्लूटूथ आधारित बैट्री मैनेजमेंट (बीएमएस) ऐप्स के ज़रिए असामाजिक तत्वों ने ई-रिक्शा बीच सडक़ पर ही रोक दिए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने ऐसे ऐप्स को प्रतिबंधित करने के कड़े निर्देश दिए। इससे साफ है कि सिर्फ सुविधा और रिमोट कंट्रोल के भरोसे छोड़े गए डिजिटल सिस्टम अगर गलत हाथों में पड़ जाएं या सर्वर डाउन हो जाएं, तो बड़ी मुसीबत हो सकती है।
बिना चाबी वाले स्मार्ट लॉक :- जिन तालों में फिज़िकल की-होल नहीं होता, वो बैट्री खत्म होने या तकनीकी खराबी आने पर अंदर फंसे व्यक्ति के लिए जानलेवा बन सकते हैं।
मैग्नेटिक और ऑटोमेटेड गेट :- बिजली जाने या सर्वर फेल होने पर कई मोटर चालित और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक दरवाजे लॉक हो जाते हैं, जिससे बाहरी मदद का रास्ता रुक जाता है।
ऐप और वाई-फाई आधारित स्मार्ट थर्मोस्टैट/एचवीएसी :- आग लगने या गैस लीक होने जैसी आपात स्थिति में अगर इंटरनेट या बिजली गुल हो जाए, तो क्लाउड-कनेक्टेड वेंटिलेशन सिस्टम बंद हो जाते हैं और मैनुअल ऑप्शन न होने पर दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है।
डिजिटल कारें व ऐप-बेस्ड चाबी :- मोबाइल ऐप या ब्लूटूथ से खुलने वाली गाडियाँ, फोन की बैट्री डेड होने या ऐप क्रैश होने पर मेडिकल इमरजेंसी के वक्त काम नहीं करती।
वाई-फाई आधारित स्मार्ट पैनिक/मेडिकल बटन :- बुज़ुर्गों की सुरक्षा के लिए लगाए गए स्मार्ट अलर्ट बटन अगर वाई-फाई पर निर्भर हैं, तो राउटर बंद होते ही पूरी तरह बेकार हो जाते हैं।
मैनुअल ऑप्शन ज़रूरी :- हर स्मार्ट डिवाइस (जैसे लॉक या गेट) में पारंपरिक चाबी या स्विच का ऑप्शन होना चाहिए।
पारिवारिक एक्सेस शेयरिंग :- डिजिटल ताले या गेट का कंट्रोल घर के अन्य सदस्यों के पास भी सुरक्षित होना चाहिए।
पावर बैकअप :- स्मार्ट लॉक और वाई-फाई राउटर के लिए हमेशा इन-बिल्ट बैटरी या यूपीएस का इस्तेमाल करें।
कड़े सरकारी नियम :- सरकार यह अनिवार्य करे कि टेक कंपनियाँ हर डिवाइस में 'इमरजेंसी प्रोटोकॉल' शामिल करें।
पारंपरिक तरीके बिल्कुल न छोड़े :- स्मार्ट टेक्नोलॉजी पर 100% निर्भर होने के बजाय इमरजेंसी के लिए बैकअप प्लान तैयार रखें और पारंपरिक तरीके बिल्कुल न छोड़े।
Updated on:
09 Aug 2026 04:05 am
Published on:
09 Aug 2026 04:03 am
