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‘लोकसभा सीटें फ्रीज की जाएं, 40-50 साल तक न हो बदलाव’, परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा में आएगा प्रस्ताव

परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित करेगी। मुख्यमंत्री विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से डीएमके ने दूरी बनाई, जिस पर सीएम ने नाराजगी जताई।
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भारत

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Rahul Yadav

Aug 08, 2026

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विजय थलापति, मुख्यमंत्री तमिलनाडु (फाइल फोटो - एएनआई)

Tamil Nadu Delimitation: तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासी विरोध तेज हो गया है। मुख्यमंत्री विजय ने शनिवार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को फ्रीज रखने और तमिलनाडु की 39 सीटों में कोई बदलाव नहीं करने की मांग पर सहमति बनी। अब इस मुद्दे पर तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी है।

हालांकि, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने बैठक से दूरी बनाई। मुख्यमंत्री विजय ने डीएमके के बैठक में शामिल नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

543 लोकसभा सीटों को फ्रीज रखने की मांग

बैठक के अंत में इस बात पर सहमति बनी कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों को भी मौजूदा स्थिति में बनाए रखने की मांग की गई। बैठक में शामिल नेताओं का कहना था कि परिसीमन के नाम पर तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। राज्य सरकार लंबे समय तक मौजूदा सीटों को बनाए रखने की मांग कर रही है।

40-50 साल तक बदलाव नहीं चाहती सरकार

सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार अगले 40 से 50 सालों तक लोकसभा सीटों में कोई बदलाव नहीं चाहती। सरकार का तर्क है कि आबादी के आधार पर परिसीमन होने पर दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

कांग्रेस ने भी बैठक में परिसीमन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। पार्टी की ओर से कहा गया कि लोगों को यह समझना जरूरी है कि तमिलनाडु सरकार परिसीमन का विरोध क्यों कर रही है।

डीएमके ने बैठक का किया बहिष्कार

मुख्यमंत्री विजय की ओर से बुलाई गई बैठक में कांग्रेस, एमडीएमके और अन्य दलों के नेता शामिल हुए। हालांकि, डीएमके ने बैठक का बहिष्कार किया।

विजय ने डीएमके के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक शासन किया और जिसके शुरुआती नेताओं ने राज्य के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, उसका बैठक में शामिल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। बैठक में कांग्रेस के चार सांसदों को भी अपनी बात रखने का मौका मिला। नेताओं ने परिसीमन के संभावित असर और तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

दक्षिणी राज्यों के अधिकारों को लेकर चिंता

तमिलनाडु सरकार पहले भी परिसीमन को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुकी है। राज्य का कहना है कि सिर्फ जनसंख्या को आधार बनाकर लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास करने से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। सरकार का तर्क है कि परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक और वित्तीय हित प्रभावित न हों। इसी मुद्दे को लेकर राज्य सरकार केंद्र के सामने अपना पक्ष रख रही है।

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