
क्रिस्टल की मुड़ी परमाणु परतों ने भविष्य के तेज़ और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स की नई राह खोल दी। ( फोटो: ChatGPT)
NC State Research : वैज्ञानिकों ने क्रिस्टल की परमाणु परतों को मोड़ने और जोड़ने की एक ऐसी अभूतपूर्व तकनीकी की खोज की है, जो लैब के प्रयोगों से बाहर निकलकर जल्द ही हमारे स्मार्टफोन, सुपरकंप्यूटर, फ्लेक्सिबल डिस्प्ले और हेल्थ मॉनिटर जैसे गैजेट्स को पहले से कहीं ज्यादा तेज, ऊर्जा-कुशल और लचीला बना सकती है। अमेरिका के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त रिसर्च टीम ने क्रिस्टलीय ऑक्साइड पदार्थों की परमाणु स्तर की अत्यंत पतली परतों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर उन्हें सही कोण (Angle) पर मोड़ने (Twist करने) और आपस में पक्के तौर पर जोड़ने का नया तरीका विकसित किया है।
इस ऐतिहासिक शोध का नेतृत्व नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी (NC State) के 'मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग' विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रुइजुआन जू (Ruijuan Xu) ने किया है। इस टीम में NC State के शोधार्थी रेजा घनबरी (Reza Ghanbari), एली रोड्रिग्स (Eli Rodriguez), यिन लियू के साथ-साथ अमरीका की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं-'ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी', 'आर्गोन नेशनल लेबोरेटरी' और 'ड्यूक यूनिवर्सिटी' के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल हैं।
यह शोध विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका 'एसीएस नैनो' (एसीएस नैनो) में "बड़े क्षेत्र, उच्च-क्रिस्टलीयता ऑक्साइड मोइरे सुपरलैटिसेस का नियतात्मक निर्माण" शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। इस परियोजना में अमेरिकी सरकार के प्रमुख प्रमुखों जैसे नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ), अमेरिकन केमिकल सोसाइटी पेट्रोलियम रिसर्च फंड, आर्मी रिसर्च ऑफिस (एआरओ) और यू.एस.एस. शामिल हैं। ऊर्जा विभाग (डीओई) से वित्तीय सहायता मिली है।
अब तक 'ट्विस्ट्रोनिक्स' (Twistronics) केवल प्रयोगशालाओं की चार दीवारों तक सीमित एक वैज्ञानिक जिज्ञासा थी, लेकिन इस नई खोज ने इसे व्यावसायिक इलेक्ट्रॉनिक्स और अगली पीढ़ी के गैजेट्स में लागू करने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
साधारण शब्दों में कहें तो ट्विस्ट्रोनिक्स (Twistronics) भौतिक विज्ञान (Physics) की वह अत्याधुनिक शाखा है, जिसमें दो-आयामी (2D) या परमाणु स्तर की बेहद पतली सामग्रियों की एक परत को दूसरी परत के ऊपर रखा जाता है और उन्हें एक-दूसरे के सापेक्ष थोड़े से कोण (Angle) पर घुमाया जाता है।
जब दो क्रिस्टलीय परतों को एक खास कोण पर घुमाकर रखा जाता है, तो उनके परमाणुओं का संरेखण (Alignment) आपस में मिलकर एक नया पैटर्न बनाता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'मोइरे पैटर्न' (Moiré Pattern) कहा जाता है। इस मामूली से घुमाव से उस पदार्थ के इलेक्ट्रॉनिक, ऑप्टिकल और भौतिक गुण पूरी तरह बदल जाते हैं।
वैज्ञानिकों ने क्रिस्टल की परमाणु परतें मोड़ने और जोड़ने की खोज की है। (फोटो: ChatGPT)
उदाहरण के लिए, एक सामान्य पदार्थ जो कमरे के तापमान पर बिजली का बहुत अच्छा चालक नहीं होता, वह केवल सही कोण पर घुमा दिए जाने मात्र से सुपरकंडक्टर (Superconductor) बन सकता है-यानि बिना किसी ऊर्जा हानि या रुकावट के बिजली प्रवाहित कर सकता है!
ट्विस्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में अब तक जितना भी शोध हुआ था, वह मुख्य रूप से ग्राफीन (Graphene) जैसी कमजोर परतों वाली सामग्रियों पर केंद्रित था।
पुरानी समस्या (weak van der Waals forces):
ये सामग्रियां आपस में केवल बहुत कमजोर अंतर-आणविक बलों (वैन डेर वाल्स फोर्स) से जुड़ी होती थीं। इस कारण:
इन्हें बड़े पैमाने पर निर्मित करना लगभग नामुमकिन था।
परतों के घुमाव कोण को स्थिर रखना और संभालना बेहद कठिन था।
लैब के बाहर असली इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में इनका इस्तेमाल व्यावहारिक नहीं हो पा रहा था।
प्रोफेसर रुइजुआन जू और उनकी टीम ने इस पुरानी धारणा को तोड़ते हुए साबित कर दिया कि मजबूत रासायनिक बंधों (Chemical Bonds) से जुड़े ऑक्साइड पदार्थों की परतों का इस्तेमाल करना भी पूरी तरह संभव है।
इस नई तकनीक को दुनिया के सामने सफलतापूर्वक प्रदर्शित करने के लिए वैज्ञानिकों ने सोडियम नायोबेट (NaNbO
3
) नाम के एक क्रिस्टलीय ऑक्साइड को मॉडल प्रणाली के रूप में इस्तेमाल किया। पूरी प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में पूरा किया गया:
चरण 1: क्रिस्टल की पतली झिल्लियां बनाना
शोधकर्ताओं ने सबसे पहले सोडियम नायोबेट (NaNbO
3
) की अत्यंत पतली, उच्च क्रिस्टलीयता वाली झिल्लियां (Membranes) तैयार कीं।
चरण 2: फोटोलिथोग्राफी और मार्किंग
फोटोलिथोग्राफी (Photolithography) तकनीक का उपयोग करते हुए, उन्होंने प्रत्येक झिल्ली के किनारों पर छोटे-छोटे दृश्य संदर्भ निशान (Visual Reference Marks) बनाए। ये निशान माइक्रोस्कोप के नीचे परतों के कोण को सटीक रूप से मापने में मदद करते हैं।
चरण 3: सटीक संरेखण (Alignment)
वैज्ञानिकों ने एक झिल्ली को उठाकर दूसरी झिल्ली के ऊपर रखा। संदर्भ निशानों का मिलान करते हुए उन्होंने दोनों परतों के बीच के घुमाव कोण (Twist Angle) को बहुत ही सावधानीपूर्वक सेट किया।
चरण 4: एनीलिंग (Heat Treatment) से मजबूत बंधन
मनचाहा कोण प्राप्त करने के बाद, सामग्री को एक विशेष ताप उपचार प्रक्रिया (Annealing Process) से गुजारा गया। इस प्रक्रिया से दोनों झिल्लियों के बीच कमजोर बलों की जगह अटूट और मजबूत रासायनिक बंधन (Chemical Bonds) बन गए, जिससे घुमाव कोण हमेशा के लिए लॉक हो गया।
जब शोधकर्ताओं ने अमेरिका की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के शक्तिशाली सिंक्रोट्रॉन एक्स-रे विवर्तन (Synchrotron X-ray Diffraction) उपकरणों से इस जुड़ी हुई सामग्री के इंटरफेस (जहां दोनों परतें मिलती हैं) की जांच की, तो उन्हें चौंकाने वाले नतीजे मिले:
परमाणु जालक का घूर्णन (Atomic Lattice Distortion): परतों के बीच बने रासायनिक बंधन इतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने सामग्री की परमाणु संरचना को ही मोड़ दिया। इंटरफेस पर परमाणुओं का जालक धीरे-धीरे खुद-ब-खुद घूमने लगा।
चरण संरचना में परिवर्तन (Phase Structure Shift): इस खिंचाव (Local Strain) के कारण पदार्थ की अंदरूनी अवस्था (Phase) में बदलाव आ गया।
क्रिस्टल मोड़कर वैज्ञानिकों ने रची नई क्रांति, जानिए कैसे बदलेंगे आपके स्मार्टफोन और अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक्स। (फोटो: Google Gemini AI.)
लोकल स्ट्रेन और रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी: हाल के अन्य क्रिस्टल बेंडिंग अध्ययनों (जैसे Atiqur Rahman et al., 2024; PMC 2023) से भी यह सिद्ध हुआ है कि जब क्रिस्टल या उसकी आणविक परतों को मोड़ा जाता है, तो अंदरूनी हिस्से (Inner Arc) में संपीड़न (Compression) से ब्लू-शिफ्ट और बाहरी हिस्से (Outer Arc) में विस्तार (Expansion) से रेड-शिफ्ट होती है। इससे लगभग 2 गीगापास्कल (GPa) तक का स्थानीय तनाव उत्पन्न होता है।
लचीलापन और स्लाइडिंग: 3-ब्रोमो-5-क्लोरोबेंजोइक एसिड (3B5CBA) जैसे क्रिस्टलों में ट्राइफ्लोरोमिथाइल समूहों वाली परतें एक-दूसरे पर बिना टूटे फिसल (Slide) सकती हैं, जो क्रिस्टल को प्लास्टिक लचीलापन प्रदान करती हैं।
बैंडगैप नियंत्रण: यूसी डेविस (UC Davis) और शेप-शिफ्टिंग इलेक्ट्रॉनिक इंक जैसे प्रयोगों ने भी दिखाया है कि तापमान, लेजर या यांत्रिक खिंचाव से क्रिस्टल की लैटिस संरचना बदलकर उसके बैंडगैप (Bandgap) और कठोरता को नियंत्रित किया जा सकता है।
NC State की इस नई खोज ने सिद्ध कर दिया है कि परमाणु स्तर पर आए इस तनाव और बदलाव का उपयोग करके हम भविष्य में कस्टम-डिजाइन इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण तैयार कर सकते हैं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबियाँ:
बड़ा क्षेत्र (Large-Area Production): ये क्रिस्टलीय झिल्लियां अब बड़े पैमाने पर/बड़े आकार में निर्मित की जा सकती हैं।
आसान ट्रांसफर (Substrate Transfer): इन्हें आसानी से उठाकर अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक सतहों या चिप्स (Substrates) पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
व्यापक अनुप्रयोग: हालांकि इस प्रयोग में NaNbO 3 का उपयोग किया गया था, परंतु यह तकनीक अन्य सभी जटिल ऑक्साइड सामग्रियों पर भी समान रूप से लागू होती है।
जब आप भविष्य में अगली पीढ़ी के स्मार्ट गैजेट्स का उपयोग करेंगे, तो इस तकनीक के कारण आपको निम्नलिखित लाभ देखने को मिलेंगे:
अत्यधिक तेज़ और ऊर्जा-कुशल माइक्रोप्रोसेसर: स्मार्टफोन और कंप्यूटर चिप्स बिना गर्म हुए दोगुनी स्पीड से काम करेंगे।
फ्लेक्सिबल और फोल्डेबल डिवाइसेस: लचीले डिस्प्ले, मोड़ने योग्य फोन और पहनने योग्य स्मार्ट वॉच/हेल्थ मॉनिटर ज्यादा मजबूत और टिकाऊ बनेंगे।
पाईज़ोइलेक्ट्रिक एनर्जी हार्वेस्टर: हमारे चलने या डिवाइस के हिलने-डुलने से उत्पन्न यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Strain) को सीधे बिजली में बदलकर बैटरी चार्ज करने वाले सेंसर्स का निर्माण हो सकेगा।
क्वांटम कंप्यूटिंग और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स: क्वांटम सेंसर और प्रकाश पर आधारित ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस की क्षमता में क्रांतिकारी सुधार होगा।
बहरहाल यह कहना पूरी तरह गलत नहीं होगा कि क्रिस्टल की परतों को मोड़ने और उनके परमाणुओं को नया आकार देने की इस विधि ने क्रिस्टल मटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। अब वैज्ञानिकों का अगला कदम इस प्रक्रिया को औद्योगिक स्तर पर बड़े पैमाने पर, पूरी तरह नियंत्रित और बार-बार दोहराने योग्य (Repeatable) बनाना होगा। साथ ही यह अध्ययन करना होगा कि इन संरचनात्मक बदलावों का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर स्थिरता (Long-term Stability) पर क्या प्रभाव पड़ता है। यदि यह तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल रहती है, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में हमारे हाथ में मौजूद स्मार्टफोन, मेडिकल इम्प्लांट्स और पहनने योग्य स्मार्ट गैजेट्स पूरी तरह से बदल जाएंगे।
'ट्विस्ट्रोनिक्स की शुरुआत कमजोर बलों वाली 2D सामग्री से हुई थी। लेकिन हमारी रिसर्च दिखाती है कि मजबूत केमिकल बॉन्ड वाले ऑक्साइड पदार्थों का उपयोग करना भी संभव है। सबसे अच्छी बात यह है कि हम दो परतों के बीच के घुमावदार कोण (Twist Angle) को अपनी मर्जी से बिल्कुल सटीक सेट कर सकते हैं। ऑक्साइड ट्विस्ट्रोनिक्स के लिए यह एक बहुत ही रोमांचक समय है। सिर्फ क्रिस्टल की परतों को मोड़कर हम नई-नई कार्यात्मकताओं वाले इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन कर सकते हैं।'
-प्रोफेसर रुइजुआन जू, डिपार्टमेंट ऑफ़ मटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग, नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी।
Updated on:
03 Aug 2026 11:56 am
Published on:
03 Aug 2026 11:56 am
