विज्ञान और टेक्नोलॉजी

गामा किरण विस्फोट खगोल में क्रांतिकारी शुुरुआत

गुरुत्वाकर्षण तरंगों और गामा किरण विस्फोटों को न्यूट्रॉन तारे से जोडऩे वाले साक्ष्य खगोल के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होंगे।

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Oct 21, 2017
Gama

बेंगलूरु. गुरुत्वाकर्षण तरंगों और गामा किरण विस्फोटों को न्यूट्रॉन तारे से जोडऩे वाले साक्ष्य खगोल के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम साबित होंगे। हाल ही वैज्ञानिकों को इस बात के प्रमाण मिले कि गामा किरण विस्फोट दो न्यूट्रॉन तारे के टकराने की वजह से होता है । अभी तक वैज्ञानिकों ने इसे सिद्धांत रूप में ही स्वीकार किया था लेकिन इसके प्रमाण मिलने के बाद जटिल ब्रह्मांड के कई रहस्यों से पर्दा उठने व ब्रह्मांड के फैलाव को अधिक शुद्धता से मापे जाने की उम्मीद बढ़ गई है।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि वर्ष 2015 से पहली बार लेजर इंटरफियरोमीटर ग्रैविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (लीगो) ने अंतरिक्ष से आती गुरुत्वाकर्षण तरंगों को पकडऩे का साक्ष्य रखा। गुरुत्वाकर्षण तरंगें पदार्थ द्वारा दिक् -काल (स्पेस टाइम) में पैदा की गई लहरें हैं। यह ऊर्जा है जो प्रकाश की गति से चलती है। महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने 100 वर्ष पूर्व ही अपने सामान्य सापेक्षिता के सिद्धांत में कहा था कि पदार्थ की गति इन तरंगों को पैदा करती है।

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शुरू में वैज्ञानिकों को इसपर विश्वास भी नहीं होता था लेकिन बीसवीं शताब्दी के मध्य तक पहुंचते- पहुंचते इस विषय में गंभीर चिंतन शुरू हो गया। सत्तर के दशक में क्वेसार तथा पल्सार जैसे उच्च ऊर्जा के स्रोतों की खोज ने वैज्ञानिकों को इस बात का विश्वास दिलाया कि इस सिद्धांत के अनुसार ब्लैकहोल तथा न्यूट्रॉन तारों की मौजूदगी के प्रबल संकेत हैं।

सिद्धांत के प्रक्षेण के बाद केवल गुरुत्वाकर्षण तरंगों की मौजूदगी का प्रमाण हासिल करना रह गया था। अस्सी के दशक के शुरू में (वर्ष १९७४ में) जोसेफ वेबर नामक अमरीकी वैज्ञानिक के एक नए किंतु पेचीदा उपकरण ने इन तरंगों के संकेत दिए जो शायद हमारी आकाशगंगा के केंद्र से आए।

पल्सार तारे की खोज से मिली नई दिशा
उन्होंने बताया कि आकाशगंगा के केंद्र में 40 लाख सूर्यों के समान भारी ब्लैकहोल है, इसके साक्ष्य अनेक प्रकार से खगोल वैज्ञानिक दे चुके हैं।
गणित के आधार पर वैज्ञानिक यह जान चुके थे कि न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक ***** के टकराव में एक नया ब्लैकहोल बन सकता है। लेकिन, ऐसे टकराव के केवल परोक्ष साक्ष्य ही मिले। वर्ष 1979 में युग्म पल्सार से संबंधित खोजों ने इन विचारों को बल दिया। इस युग्म में दोनों घटक न्यूट्रॉन तारे हैं और इनकी कक्षा धीरे-धीरे छोटी होती जा रही है। बढ़ती गति के साथ ये एक दूसरे के निकट होते जा रहे हैं। इस क्रिया में ऊर्जा गुरुत्वाकर्षण तरंगों के रूप में निकल रही है। इस खोज के लिए डॉ हल्स एवं टेलर को नोबल पुरस्कार मिला।

ऐसे मिला न्यूट्रॉन तारे के टकराने का साक्ष्य
गामा किरण विस्फोटों के जरिए खोजबीन का एक नया सूत्र मिला। युग्म पलसार की भांति ब्लैकहोल भी जोड़े में हो सकते हैं। इनके आपस में टकरा जाने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलेंगी। वर्ष 2015 में लीगो ने ऐसी ही घटनाओं से आती गुरुत्वाकर्षण तरंगों को पकड़ा और बाद की घटनाओं में इटली में वर्गो नामक वेधशाला से स्वतंत्र रूप से पुष्टि हुई। इस वर्ष 17 अगस्त को एक और संकेत मिला। यह बेहद रोमांचक खोज है क्योंकि यह माना गया कि यह घटना दो न्यूट्रान तारों के आपस में टकरा जाने से हुई है। गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खबर विभिन्न वेधशालाओं में पहुंची और अंतरिक्ष में तथा भूमि पर स्थित वेधशालाओं ने आकाश के उस हिस्से की ओर अपनी दृष्टि जमा ली। गुरुत्वाकर्षण तरंगों के संकेत के दो सेकेंड बाद ही उसी दिशा से गामा किरण विस्फोट के संकेत मिले। साथ ही प्रकाशित किरणों का भी विकिरण हुआ। यह पहला मौका है
जब दो न्यूट्रॉन तारों का टकराव एक साथ अनेक तरंगों पर सीधे देख पाने का मौका मिला। घटना के 9 दिन बाद चंद्रा वेधशाला ने इसी दिशा से आती एक्स-किरणों को पकड़ा। वर्ष 3017 की यह सबसे महत्वपूर्ण खोज है। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में 70 वेधशालाएं शामिल हैं। सम्मिलित
वैज्ञानिकों की संख्या 3500 है और खुशी की बात है कि इसमें देश के अनेक प्रमुख संस्थान और युवा वैज्ञानिक शामिल हैं। इसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अंतरिक्ष वेधशाला एस्ट्रोसैट के पे-लोड सीजेडटी इमेजर ने भी योगदान दिया। इस घटना के आधार पर ब्रह्मांड के फैलाव को अधिक शुद्धता से मापने का मौका मिला है।

क्या होता है जब टकराते हैं दो न्यूट्रॉन तारे या ब्लैकहोल
प्रो. कपूर ने कहा कि न्यूट्रॉन तारे अत्यंत घने तारें हैं। सूर्य के बाहर का समकक्ष तारा आकार में बेंगलूरु शहर से भी छोटा है। दो न्यूट्रॉन तारों के टकराव में एक बड़ा न्यूट्रान तारा बन सकता है जो कुछ ही क्षणों में ध्वस्त होकर ब्लैकहोल बन जाएगा। ऐसे में न्यूट्रॉन तारे के पदार्थ का
बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष में छितरा जाता है अति उच्च तापक्रम पर नाभिकीय प्रक्रियाओं में भारी तत्वों का निर्माण हो जाता है। इसमें न सिर्फ सोना
और प्लैटिनम शामिल हैं बल्कि आवर्त सारणी के सबसे आखिर के भारी धातु तत्व भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया में एक बड़े शक्तिशाली विस्फोट में ऊर्जा विभिन्न रूपों में निकलेगी। न्यूट्रॉन तारे और ब्लैकहोल के टकराव में भी कमोबेश यहीं होगा और गामा किरण विस्फोट होगा। ब्लैकहोल जोड़े के आपसी टकराव में एक नया ब्लैकहोल बनेगा किंतु उसमें केवल गुरुत्वाकर्षण तरंगें ही निकलेंगी।

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Published on:
21 Oct 2017 10:46 pm
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