
When the stars are seen in the day
इटारसी। तारे देखने के लिए आपको रात का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बुधवार को इटारसी कुछ ऐसा हुआ कि बच्चों को दिन ही तारे दिख गए। जीहां चलित तारामंडल की मदद से विश्रामगृह परिसर में दिन में रात का आकाश और उसमेंं चमकते तारों, ग्रहों और नक्षत्रों को दिन में दिखाया गया। प्रोफेसर के एस उप्पल ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
विज्ञानवाणी केंद्र के डायरेक्टर राजेश पाराशर ने बच्चों में खगोल विज्ञान की समझ को बढ़ाने के लिये यह कार्यक्रम किया। पाराशर ने बताया कि इस चलित प्रदर्शनी और तारामंडल को प्रथम बार इटारसी में आमंत्रित किया गया है। महानगरों के साइंस सेंटर में तो तारामंडल की सुविधा है लेकिन स्थानीय बच्चों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम किया गया। इसके माध्यम से एस्ट्रोनॉमी एवं एस्ट्रोलॉजी में अंतर समझने एवं वैज्ञानिक तथा पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली।
इंद्रौर से आई थी मॉडल प्रदर्शनी
इंदौर से आमंत्रित स्त्रोत वैज्ञानिक चिल्ड्रन्स साइंस सेंटर के डॉयरेक्टर राजेंद्र सिंह ने राशिचक्र, तारामंडल, नक्षत्रों, आकाशगंगा तथा ग्रहों की प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि एप्को की सहायता से वन अधिकार पत्र प्राप्त हितग्राहियों में पर्यावरण एवं जानकारी बढ़ाने के लिये जैवविविधता संरक्षण के पोस्टर तथा मॉडल प्रदर्शनी लगाई जा रही है। कार्यक्रम में एक्सीलेंस स्कूल केसला के प्राचार्य एस के सक्सेना, पांजराकला के पूर्व प्राचार्य एस के शर्मा मौजूद थे। प्रदर्शनी में तारामंडल को 8 से अधिक स्कूलों के 500 से ज्यादा बच्चों ने देखा।
आकाशगंगा के बारे में भी जनजातीय लोग अच्छी जानकारी रखते हैं। हालांकि, रात में सभी तारों में से सबसे ज्यादा चमकीले नजर आने वाले व्याध तारा (Sirius) और अभिजित तारा (Vega) के बारे में उनको कोई ज्ञान नहीं है। सभी आकाशीय पिंडों को लेकर प्रत्येक जनजाति की अलग-अलग परन्तु सटीक अवधारणाएं हैं और ये जनजातियां अपनी खगोल-वैज्ञानिक सांस्कृतिक जड़ों के बारे में बहुत ही रूढ़िवादी पाई गई हैं।
आमतौर पर मानसून के कारण भारत में मई से अक्तूबर के बीच आसमान में तारे कम ही दिखाई देते हैं। अतः इन जनजातियों की खगोलीय अवधारणाएं नवंबर से अप्रैल तक आकाश में दिखने वाले तारामंडलों पर विशेष रूप से केंद्रित होती हैं। शोधकर्ताओं ने एक रोचक बात यह भी देखी है कि ज्यादातर जनजातियां ग्रहों में केवल शुक्र और मंगल का ही उल्लेख करती हैं, जबकि अन्य ग्रहों की वे चर्चा नहीं करती हैं।
Published on:
12 Oct 2017 11:13 pm
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