Mission Chandrayaan-3 : 24.2 लाख रुपए की लागत से बेंगलुरु से 215 किमी दूर स्थित जगह पर तैयार किए गए हैं नकली गड्ढे चांद की असली सतह पर लैंडर को उतरने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए इन गड्ढों पर होगी प्रैक्टिस
नई दिल्ली। चंद्रयान 2 में भले ही भारतीय वैज्ञानिकों को कामयाबी नहीं मिल सकी, लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानी इसरो (ISRO) अब चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) को लांच करने की तैयारी में है। इसे अगले साल लांच किया जाएगा। मिशन में लैंडर और रोवर को भेजा जाएगा, जिससे चांद के पास घूम रहे चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर के साथ संपर्क किया जा सके। चांद के गड्ढों पर चंद्रयान-3 के लैंडर-रोवर अच्छे से उतर कर काम कर सकें, इसके लिए बेंगलुरु के पास नकली चांद के गड्ढे भी तैयार किए जाएंगे। इन गड्ढों (False Crater) को बनाने में करीब 24.2 लाख रुपए की लागत आएगी।
चांद के लिए ये गड्ढे बेंगलुरु से 215 किलोमीटर दूर छल्लाकेरे के पास उलार्थी कवालू में बनाए जा रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गड्ढ़ों को तैयार करने के लिए टेंडर जारी किया गया है। सितंबर की शुरुआत तक कंपनी फाइनल कर ली जाएगी। ये गड्ढे 10 मीटर व्यास और तीन मीटर गहरे होंगे। चांद की सतह पर उतरने से पहले चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर इन नकली गड्ढ़ों में उतरने की प्रैक्टिस करेंगे। जिससे वहां कोई चूक न हो। साथ ही उसमें लगने वाले सेंसर्स से लैंडर का परफॉर्मेंस टेस्ट किया जाएगा।
चंद्रयान-3 मिशन में ज्यादातर प्रोग्राम पहले से ही ऑटोमेटेड होंगे। इसमें लगे सैकड़ों सेंसर्स लैंडर के लैंडिंग के वक्त ऊंचाई, लैंडिंग की जगह, गति, पत्थरों से लैंडर को दूर रखने आदि में मदद करेंगे। इन नकली चांद के गड्ढों पर चंद्रयान-3 का लैंडर 7 किलोमीटर की ऊंचाई से उतरेगा। जब ये 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर होगा तभी इसके सेंसर्स काम करने लगेंगे। उनके अनुसार ही लैंडर अपनी दिशा, गति और लैंडिंग साइट तय करेगा। चंद्रयान-2 में हुई चूक न हो इसलिए इसरो इस बार ज्यादा ध्यान दे रहा है। लैंडर का परीक्षण इसरो सैटेलाइट नेविगेशन एंड टेस्ट इस्टैब्लिशमेंट में कर रहे हैं।