
नई दिल्ली - निजी जिंदगी में खरीदारी से लेकर बिजली ( electricity ) व अन्य बिल भरने में मिलने वाली पर्ची कितनी खतरनाक है क्या आपको इस बारें में पता है ? जी हां इन पर्चियों में इस्तेमाल होने वाली इंक हमारी सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रही है। बीपीए (बायस्फीनॉल-ए ) नाम की ये इंक एक बेहत खतरवाक केमिकल ( chemical ) से बनी हुई है। इस केमिकल वाली इंक से अखबार ( newspaper ),बस की टिकट,मॉल व अन्य स्वैपिंग मशीन से मिलने वाली पर्चियां ही नहीं बल्कि अन्य चीजें भी इसी इंक से छापी जाती हैं। चलिए आपको बेहद खतरनाक केमिल के बारे में जानकारी देते हैं कि आखिर क्या है ये बीपीए इंक।
क्या है बायस्फीनॉल-ए
बायस्फीनॉल-ए एक ऐसा कैमिकल है, जिसका यूज कई प्रोडक्ट में वर्षों से हो रहा है। खासकर एयर टाइट डिब्बे, स्पोटर्स के समान, सीडी और डीवीडी , वाटर पाइप ( water pipe ) की लीकेज को ठीक करने और खाने के प्रॉडक्ट वाले पैकेट पर कोटिंग चढ़ाने के काम में आता है। इस वजह से यूरोप में बच्चों की फीडिंग बॉटल बनाने में इसके यूज को वर्षों पहले बैन कर दिया गया है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता
कुछ वर्षों पहले महाराष्ट्र की डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी द्वारा की गई एक खोज के मुताबिक कागज पर की गई कैमिकल कोटिंग इंसान के शरीर के लिए काफी खतनाक हो सकती है। इन पर्चियों पर कुछ भी छापने के लिए थर्मल प्रिंटर का उपयोग किया जाता है। इसलिए जहां तक संभव हो ऐसी पर्ची को खुद से दूर रखें। क्योंकि इसके लगातार संपर्क में आने से स्कीन में साइड इफेक्ट होने का खतरा ज्यादा रहता है और इंसान गंभीर बीमारी का शिकार हो सकता है।
इन बीमारियों में त्वचा में होने वाले विकार सबसे ज्यादा देखे गए हैं। इन कागजों की कोटिंग में ट्रायरील मिथेन थॉलिड के ल्यूको डाय, बीपीए, बायस्फेनॉल-बी (बीपीएस) और स्टेब्लाइजर्स का उपयोग होता है। आज कल इसका सबसे ज्यादा यूज थर्मल प्रिंटर में उपयोग किए जाने वाले पेपर कोटिंग पर बायस्फेनॉल-ए का उपयोग किया जाता है।