विज्ञान और टेक्नोलॉजी

जाने-अनजाने आप इतनी मात्रा में ले रहे हैं प्लास्टिक, रोजमर्रा की इन चीजों में मिलती है इसकी भारी मात्रा

प्लास्टिक सेहत पर डाल रहा है बुरा असर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल हो रहा प्लास्टिक प्लास्टिक में पाए जाने वाले माइक्रोप्लास्टिक हैं सबसे खतरनाक
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Updated: 8 Apr 2019, 4:58 PM IST
how to dangerous plastic in our health and environment
जाने अनजाने आप इतनी मात्रा में ले रहे हो प्लास्टिक, रोजमर्रा की इन चीजों में मिलती है इनकी भारी मात्रा

नई दिल्ली- इंसान प्लास्टिक से बुरी तरह घिर चुका है। वह प्लास्टिक से जुड़ी छोटी से छोटी चीजों को रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग में ला रहा हैं। जैसे टूथपेस्ट , हेयर ऑयल से लेकर मेकअप तक का सामान भी प्लास्टिक से बना होता है। इन्हीं प्लास्टिक में उपस्थित माइक्रोप्लास्टिक नामक कण सबसे खतरनाक होता हैं। जो सेहत को अत्यधिक नुकसान पहुंचा रहा है। इतना ही नहीं, ये कण सुबह टूथपेस्ट के साथ ही माइक्रोप्लास्टिक( micro plastic ) के जरिए हमारे शरीर में पहुंच रहा है।

क्या होता माइक्रोप्लास्टिक

पांच मिलीमीटर से कम परिधि वाले प्लास्टिक के कणों में माइक्रोप्लास्टिक पाएं जाते हैं। माइक्रोप्लास्टिक या माइक्रोबीड्स प्लास्टिक एक तरह के अंश या रेशे होते हैं। जो बहुत ही छोटे होते हैं। इनको कई तरह से प्रयोग में लाया जा रहा है, जिनमें विशेष रूप से टूथपेस्ट, कपड़े, बॉडी क्रीम जैसे व्यक्तिगत देखभाल वाले उत्पाद व औद्योगिक उपयोग शामिल हैं। इनमें सरलतापूर्वक फैलने की क्षमता होती है और वे उत्पाद को रेशमी बनावट और रंग प्रदान करते हैं। इस प्रकार से बनी चीजें उत्पादों को दृश्य प्रदान करते हैं।

सेहत के साथ हो रहा पर्यावरण को भी नुकसान

आपको बता दें कि माइक्रोप्लास्टिक घर के सीवरेज सिस्टम से होकर नदियों में और वहां से सीधा समुद्र में पहुंचता है। पानी में घुला हुआ यह माइक्रोप्लास्टिक सीधा मछलियों के पेट तक पहुंचता है और मछलियों के अलावा दूसरे सी-फूड़ में भी यह पहुंच रहा है। 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया ( Indonesia )और केलिफोर्निया की 25% मछलियों में प्लास्टिक मिला है। माइक्रोप्लास्टिक आहार चक्र के जरिए इंसान तक पहुंच रहा है। इतना ही नहीं, कपड़े धोने के दौरान भी यह पैदा होती है।

एक रिसर्च में पता चला कि 6 किलोग्राम कपड़े धोने से 700000 से ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक के फाइबर निकलते हैं। महासागरों में लगभग 35 % माइक्रोप्लास्टिक सिंथेटिक टेक्सटाइल से ही पहुंचता है। हाल ही में यूरोपीय संघ की प्लास्टिक के खिलाफ बनाई गई रणनीति में यह कहा गया है कि शहद में माइक्रोप्लास्टिक की अच्छी खासी मात्रा मौजूद हैं।

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8 Apr 2019, 4:58 PM IST
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