
नई दिल्ली। साल 1972 में पहली बार नासा (NASA) ने चांद पर इंसान को भेजा था। ये उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। नासा दोबारा से वो कीर्तिमान दोहराने वाला है, लेकिन इस बार उसका अंदाज थोड़ा अलग होगा। दरअसल नासा अपने 2024 के मून मिशन (Moon Mission 2024) के लिए पहली बार महिला एस्ट्रोनॉट (Female Astronaut) को भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन पर एक पुरुष ऐस्ट्रोनॉट भी साथ जाएंगे। यह मिशन 4 साल में पूरा होगा और इस पर करीब 28 बिलियन डॉलर यानि 2 लाख करोड़ रुपए का खर्च आने की संभावना है।
नासा प्रमुख जिम ब्रिडेनस्टीन (NASA Chief Jim Bridenstein) ने बताया कि मिशन के तहत चंद्रमा के साउथ पोल पर अंतरिक्षयान की लैंडिंग कराई जाएगी। इस मिशन में नई तरह की चीजों की खोज होगी। चूंकि 969 के अपोलो मिशन के समय पता चला था कि चांद के साउथ पोल पर भारी मात्रा में पानी मौजूद है। इस वक्त तीन लूनर लैंडर के निर्माण का कार्य चल रहा हैं। पहला लैंडर ब्लू ओरिजिन अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की कंपनी बना रही है, दूसरा लैंडर एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और तीसरा लैंडर डाइनेटिक्स कंपनी बना रही हैं। नासा ने अपने इस मिशन को अर्टेमिस नाम दिया है। मिशन का पहला फेज पहला नवंबर 2021 में शुरू होगा। इसमें मानव रहित ओरियन स्पेसक्राफ्ट भेजे जाएंगे। जबकि दूसरे और तीसरे फेज में अंतरिक्ष यात्री चांद पर कदम रखेंगे।
नासा प्रमुख के मुताबिक अभी मून मिशन को लेकर थोड़ी बजट की समस्या है। क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव के चलते प्रक्रिया के पूरे होने में वक्त लग रहा है। अगर अमेरिकी संसद दिसंबर तक प्रारंभिक बजट के तौर पर 23 हजार 545 करोड़ रुपये की मंजूरी देती है, तो ये प्रोजेक्ट अपने तय समय से शुरू किया जा सकेगा। मालूम हो कि नासा के अलावा भारतीय वैज्ञानिकों ने चंद्रयान के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की कोशिश की थी। मगर आखिरी समय में विक्रम लैंडर के गलत लैंडिंग से ये मिशन कामयाब नहीं हो पाया था। इससे भारतीयों को काफी निराशा हुई थी।