
लंदन. लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दृष्टि और स्पर्श के बारे में सदियों पुराने दार्शनिक प्रश्न का समाधान निकालने का दावा किया है। डॉ. एलिसबेटा वर्साचे के नेतृत्व में टीम ने 1688 में विलियम मोलिनेक्स द्वारा पूछे गए प्रश्न का जवाब ढूंढने के लिए चूजों की मदद ली। प्रश्न था, क्या कोई जन्म से दृष्टिहीन व्यक्ति दृष्टि प्राप्त करने के तुरंत बाद वस्तुओं को पहचान सकता है। मोलिनेक्स की थ्योरी के मुताबिक जन्म से दृष्टिहीन व्यक्ति घन और गोले में अंतर करना सीखता है। लेकिन दृष्टि प्राप्त करने के बाद वह बिना स्पर्श किए घन (क्यूब) और गोले (स्फेयर) को पहचानने में सक्षम होगा? डॉ. वर्साचे का कहना है कि इंसानों में इस प्रश्न का जवाब खोजना नैतिक रूप से चुनौती था, इसलिए चूजों का उपयोग किया गया। स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल एंड बिहेवियरल साइंसेज के व्याख्याता डॉ. वर्साचे बताते हें कि इंसान और अन्य स्तनधारियों के विपरीत चूजे अच्छी तरह से विकसित संवेदी प्रणालियों के साथ पैदा होते हैं।
चूजों को 24 घंटे के लिए अंधेरे में रखा
शोधकर्ताओं ने चूजों को जीवन के पहले 24 घंटों के लिए चिकनी और ऊबड़-खाबड़ वस्तुओं के संपर्क में रखा गया, जो उनका पहला स्पर्श था। लेकिन जैसे ही इन चूजों को पहली बार प्रकाश में लाया गया, तो जिन चूजों ने चिकनी वस्तुओं को स्पर्श किया था, वे उनके करीब पहुंचे, जबकि ऊबड़-खाबड़ वस्तुओं को छूने वाले चूजे ऐसी वस्तुओं के ही करीब गए। इससे शोधकर्ताओं ने पाया कि चूजे बिना किसी पूर्व दृश्य अनुभव के भी स्पर्श को दृष्टि से जोड़ सकते हैं। डॉ. वर्साचे ने कहा, यह ख्चाोज पारंपरिक सिद्धांतों का खंडन करती है। इससे पता चलता है कि हमारा दिमाग अलग-अलग इंद्रियों के बीच संबंध बनाने के लिए पहले से ही तैयार है। इससे यह समझ भी विकसित होती है कि हमारी इंद्रियां कैसे विकसित होती हैं और हमारे आसपास की दुनिया के साथ कैसे संवाद करती हैं?