7 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गोबर से चलेगा एआई का दिमाग! डेटा सेंटर्स की ज़रूरत होगी पूरी

एआई के लिए अब गोबर का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे डेटा सेंटर्स की ज़रूरत भी पूरी होगी। कैसे? आइए नज़र डालते हैं।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Tanay Mishra

Jul 08, 2026

Data center

एआई डेटा सेंटर (File Photo)

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। एआई जितनी तेज़ी से दुनिया बदल रहा है, उतनी ही तेज़ी से वह बिजली भी निगल रहा है। चैटबॉट्स से लेकर विशाल एआई मॉडल्स तक, हर नई तकनीक के पीछे ऐसे डेटा सेंटर्स काम कर रहे हैं जिन्हें चौबीसों घंटे बिजली चाहिए। अब सवाल यह है कि इस बढ़ती बिजली की ज़रूरत को पूरा कैसे किया जाए? इसका एक चौंकाने वाला जवाब डेयरी फार्मों और गाय के गोबर में भी छिपा है।

अमेरिका में तेज़ी से बढ़ रहा यह मॉडल

अमेरिका (United States of America) में यह मॉडल तेजी से बढ़ रहा है। यह मॉडल मीथेन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ जैविक खाद भी उपलब्ध कराता है। अमेरिका में 2015 के 41 आरएनजी प्रोजेक्ट्स अब बढ़कर 100 से भी कहीं ज़्यादा हो चुके हैं और डेयरी फार्म इसका सबसे तेज़ी से बढ़ता स्रोत बन गए हैं।

समाधान का एक बड़ा हिस्सा

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईइए) के अनुसार 2030 तक दुनिया के डेटा सेंटर्स की वार्षिक बिजली खपत बढ़कर 945 टेरावॉट-घंटे तक पहुंच सकती है, जो जापान की मौजूदा कुल बिजली खपत से भी ज़्यादा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि केवल गोबर ही एआई की बिजली की पूरी ज़रूरत नहीं पूरी कर सकता लेकिन समाधान का एक बड़ा हिस्सा बन सकता है।

गोबर से बनती है प्राकृतिक गैस

जब गोबर प्राकृतिक रूप से सड़ता है तो उससे मीथेन निकलती है, जो 20 वर्षों के पैमाने पर कार्बन डाईऑक्साइड से 84 गुना ज़्यादा प्रभावी ग्रीनहाउस गैस मानी जाती है। इसे रोकने के लिए एनेरोबिक डाइजेस्टर्स नामक सील टैंकों में जैविक कचरे को प्रोसेस किया जाता है। शुद्धिकरण के बाद 90% से ज़्यादा मीथेन रिन्यूएबल नेचुरल गैस (आरएनजी) बन जाती है।

इसलिए पसंद आ रही है यह तकनीक

इस तकनीक के कई समर्थक हैं और इसके कई फायदे भी हैं। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) के अनुसार आरएनजी को मौजूदा गैस पाइपलाइन और बिजली संयंत्रों में सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि सौर और पवन ऊर्जा की तरह यह मौसम पर निर्भर नहीं है और लगातार बिजली उपलब्ध करा सकती है, जो एआई डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी जरूरत है।