विज्ञान और टेक्नोलॉजी

अब दूर होंगे चेहरे पर से जले के निशान, काम आएगा ‘सिलिकॉन मास्क’

दुनियाभर में हर साल हजारों लोगों की मौत जलने से हो जाती है, वहीं लाखों लोग आग या किसी अन्य कारण से मध्यम या गंभीर रूप से जल जाते हैं, जिसका निशान जीवनभर के लिए बन जाता है। लेकिन अब इसे दूर करने की तकनीकि को खोज लिया गया है। इसके लिए सिलिकॉन मास्क का उपयोग करना होगा।
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Updated: 5 Dec 2018, 5:05 PM IST
Silicone mask can treat burn scar on face
अब दूर होंगे चेहरे पर से जले के निशान, काम आएगा 'सिलिकॉन मास्क'

नई दिल्ली। दुनियाभर में हर साल हजारों लोगों की मौत जलने से हो जाती है, वहीं लाखों लोग आग या किसी अन्य कारण से मध्यम या गंभीर रूप से जल जाते हैं, जिसका निशान जीवनभर के लिए बन जाता है। लेकिन अब इसे दूर करने की तकनीकि को खोज लिया गया है। इसके लिए सिलिकॉन मास्क का उपयोग करना होगा। जिससे चेहरे पर जले के निशान को हटाया जा सकेगा। एक अनुमान के अनुसार अकेले भारत में हर साल 10,00,000 से अधिक लोग मध्यम या गंभीर रूप से जल जाते हैं।

बता दें कि आग या अन्य किसी कारण से जले मरीजों के बीच सिलिकॉन मास्क के फैब्रिकेशन पर जागरूकता फैलाने को लेकर इन्द्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने यहां एक फेस मास्क प्री-कांग्रेस कार्यशाला लगाई है। जिसमें चेहरे पर जलने की चोट में 'सिलिकॉन मास्क' के फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। यह कार्यशाला इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ बर्न इंजरीज (आईएसबीआई) 2018 की पांच दिवसीय 19वीं कांग्रेस एक हिस्सा है। इसका आयोजन 30 नवंबर से चार दिसम्बर 2018 के बीच दिल्ली के शाहदरा स्थित लीला कन्वेन्शन सेंटर में किया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हर साल जलने के कारण लगभग 1,80,000 लोगों की मौतें होती हैं, जिनमें से ज्यादातर मौतें निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में होती हैं। कार्यशाला में डॉक्टरों के समूह ने बताया कि आज इस क्षेत्र में हुई आधुनिक तकनीकों की खोज के चलते ये मरीज भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने बताया कि जलने के कारण त्वचा और टिश्यूज को नुकसान पहुंचता है। आमतौर पर ये मरीज आग, गर्म तरल पदार्थों या फिर रसायनों जैसे एसिड से जलते हैं। ऐसे में प्लास्टिक सर्जरी न केवल चोट को ठीक करती है बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी मरीज को मजबूत बनाती है। कई मामलों में सफल प्लास्टिक सर्जरी से मरीज का आत्मविश्वास बढ़ता है। इस कार्यशाला में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए काम करने वाले एनजीओ, मरीजों और प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया था।

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