सीहोर

सात साल तक दैहिक शोषण और तीन बार गर्भपात कराने वाले को दस साल सजा

बलात्कार और गर्भपात कराने के दोषी युवक को अलग-अलग धाराओं में एक- एक लाख रुपए का अर्थदंड

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Jun 28, 2018
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सात साल तक दैहिक शोषण और तीन बार गर्भपात कराने वाले को दस साल सजा

सीहोर। सात साल तक दैहिक शोषण करने और तीन बार गर्भपात कराने के बाद विवाह से मुकरे युवक को जिला कोर्ट से दस साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दुष्कृ त्य और गर्भपात कराने का दोषी पाते हुए दो लाख रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। यह फैसला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एके सिंह ने सुनाया है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक रेखा चौरसिया ने पैरवी करते हुए बताया कि आराकश मोहल्ला गंज निवासी युवती की अपनी बड़ी बहन के यहां आने जाने वाले क्षेत्र के ही युवक रवि प्रजापति (२२) से जान पहचान हो गई थी। संपर्क बढऩे के बाद 2 मई 2010 से युवक ने गंज में ही दिनेश शर्मा का मकान किराए पर दिला दिया था।

इसके बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे थे। बताया जाता है कि युवती द्वारा रवि प्रजापति से शादी की बात कह जाने पर अपने ऊपर कर्जा होने की बात बताते हुए युवक हर बार टाल देता था। इस दौरान शारीरिक संबंध स्थापित हो जाने के दौरान युवती तीन बार गर्भवती भी हो गई लेकिन तीनों बार युवक ने गर्भपात करा दिया।

शादी की जिद करने पर युवक ने युवती के घर आना-जाना बंद कर दिया। रवि प्रजापति के आष्टा में किसी अन्य युवती के साथ सगाई करने की जानकारी मिलने पर पीडि़ता ने कोतवाली थाने पहुंचकर 2 मई 2010 से लेकर 5 जुलाई 2017 तक दैहिक शोषण और तीन बार गर्भपात की रिपोर्ट दर्ज कराई। कोतवाली पुलिस ने युवती की शिकायत पर आरोपी रवि प्रजापति के खिलाफ अपराधिक प्रकरण कायम करते हुए चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।

इस तरह सुनाई सजा
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एके सिंह ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी युवक रवि प्रजापति पर भादवि की धारा 376/2 एन और भादवि की धारा 313 का आरोप दोष सिद्व पाते हुए भादवि की धारा 376/2 एन में 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए का अर्थदंड और भादवि की धारा 313 में 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न भरने के स्थिति में छह छह माह का अतिरिक्त कारावास पृथक से भुगताए जाने के आदेश दिए गए।

Published on:
28 Jun 2018 11:18 am