
सीहोर. जब-जब भी धरती पर असुरी शक्ति हावी हुई है, परमात्मा ने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करते हंै। मथुरा में राजा कंस के अत्याचारों से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रूप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया।
यह बात ग्राम ढाबलामाता में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए पं. राजेश शर्मा ने कही।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह सुअवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा सुनते हुए उसी के अनुसार कार्य करें। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा। जब उसके बताए हुए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करें।
उन्होंने रामकथा का संक्षिप्त में वर्णन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने धरती को राक्षसों से मुक्त करने के लिए अवतार धारण किया। कथा में कृष्ण जन्म का वर्णन होने पर समूचा पांडाल खुशी से झूम उठा। मौजूद श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जय-जय कार के साथ झूमकर कृष्ण जन्म की खुशियां मनाई। कथा सुनने खेजड़ा सेमलीजदीद मुवाड़ा सहित आसपास के गांव से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
भजन संध्या का आयोजन 17 को
अकोदिया. एक शाम खाटू वाले के नाम भजन संध्या का आयोजन किया जाएगी। आयोजन खींची गार्डन में 17 फरवरी को शाम 7 बजे से होगा। जिसमें सुप्रसिद्ध भजन गायिका निशा द्विवेदी, गायक कपिल सोनी, भजन सम्राट देवेंद्र राजपूत अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
संतों का अपमान नहीं करना चाहिए-
वहीं दूसरी ओर रेहटी के दिगवाड़ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित अशोक व्यास शास्त्री ने कहा कि कभी भी भूल कर संतों का अपमान नहीं करना चाहिए। संतों का अपमान करने वालों का कभी भी भला नहीं हो सकता।
उन्होंने आगे बताया कि एक बार राजा परीक्षित ने संत का अपमान किया था, उसी के कारण उन्हें संत का श्राप लगा था। आगे कथा को विस्तार से कहते हुए शास्त्री जी ने बताया कि श्री सुखदेव जी गो लोक धाम के वासी थे, लेकिन भगवान की कथा के कारण ही मृत्यु लोक आए।
मृत्यु लोक में आकर उन्होंने भगवान की कथा का श्रवण किया। इन्हीं सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को अमर बनाने वाली कथा का श्रवण कराया। राजा परीक्षित को संत का श्राप लगा था, संत का हमेशा सम्मान करना चाहिए अपमान नहीं करना चाहिए। कथा में अन्य प्रसंगों के साथ साथ सुंदर भजन भी हुए। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने सुंदर भजनों पर श्रोताओं ने जमकर नृत्य भी किया।