
सीहोर। अब आरटीई के तहत एचआईवी पीडि़त गरीब वर्ग के बच्चे भी निशुल्क प्रवेश लेकर बिना भेदभाव के पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए उनको ऑनलाइन आवेदन करना होगा। उनकी जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी। अन्य बच्चों की तरह सभी सुविधा दी जाएंगी। राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे लेकर दिशा निर्देश जारी किया है।
आरटीई (राइट टू एज्यूकेशन) शिक्षा का अधिकार अधिनियम २००९ में हर साल संशोधन किए जा रहे हैं। जिससे कि ज्यादा से ज्यादा गरीब वंचित बच्चेइसका लाभ ले सकें। इस बार राज्य शिक्षा केंद्र ने कमजोर व वंचित समूह के बच्चों के अलावा एचआइवी (एड्स) पीडि़त बच्चों को भी आरटीई में प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। ऐसे बच्चे की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड का प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। विकल्प के तौर पर स्कूलों का चयन कर सकते हैं।
निजी स्कूल में सीट रिजर्व
आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। नए नियमों में स्पष्ट किया है कि प्रवेश के लिए आवेदन करते समय आधार नंबर की जरूरत नहीं है। लॉटरी निकले तक आधार कार्ड बनाकर जमा कराना होगा। आरटीई के तहत जिले के ७३१ प्राइवेट स्कूलों में २५ प्रतिशत के मान से सीटें आरक्षित हैं।
भेदभाव के चलते नहीं ले पाते प्रवेश
कई पालक ऐसे हैं जिनके बच्चे एचआइवी ग्रस्त हैं तो वह उनको स्कूल में प्रवेश नहीं दिलाते हैं। इसका एक कारण यह भी था कि कही इस बारे में किसी को पता चल गया तो बच्चे से भेदभाव हो सकता है। शिक्षा विभाग ने नए नियम में इसका पूरी तरह से ध्यान रखा है। जिससे कि बच्चे आसानी से अपना भविष्य संवार सकें।
जानकारी गुप्त रखी जाएगी
आरटीई के तहत पढ़ाई करने एचआइवी पीडि़त बच्चे भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उनकी जानकारी गुप्त रखी जाएगी। उनको अन्य बच्चों की तरह ही शिक्षा दी जाएगी।
अनिल श्रीवास्तव, डीपीसी सीहोर