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Longest Day Of The Year: सूरज और पृथ्वी का सबसे लंबा मिलन जानिए क्या है वैज्ञानिक रहस्य

Longest Day Of The Year: सूरज और पृथ्वी का सबसे लंबा मिलन जानिए क्या है वैज्ञानिक रहस्य

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Longest Day Of The Year: सूरज और पृथ्वी का सबसे लंबा मिलन जानिए क्या है वैज्ञानिक रहस्य

भोपाल। फिर दिन डल गया, फिर रात आ गई। यह क्रम तो चलता ही चलता है। पर, आज की दौड़भाग भरी जिंदगी में व्यक्ति को 24 घंटे का समय भी कम पड़ता है। ऐसे में कभी कभी हम सोचते हैं कि काश हमें दिन में थोड़ा वक्त् ज्यादा मिल जाएं जिससे हम अपने कामों को बेहतर तरीके से निपटा सकें। शायद लोगों की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए 21 जून साल का सबसे दिन बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। जो हमें यह सिखाता है कि किस तरह हमें दिन में ज्यादा मेहनत करनी है और रात को आराम कम करना है।

देखा जाए तो यह दिन एक तरह से हमें ज्यादा मेहनत करने के लिए भी प्रेरित करता है। शायद इसलिए साल के 365 दिनों में एक दिन और एक रात सबसे लंबे रहते है। साल का सबसे लंबा दिन 21 जून होता है। पर, ऐसा नहीं है कि साल का सबसे लंबा दिन 21 जून को ही हो। यह साल में 20, 21 और 22 किसी भी दिन हो सकता है। इसमें 22 जून को पढ़ने वाला सबसे लंबा दिन बहुत खास होता है। 1975 में 22 जून का दिन साल का सबसे बड़ा दिन था। इसके बाद दुबारा 2203 में 22 जून का दिन सबसे बड़ा दिन होगा।

इस दिन सूर्य कि किरणें सबसे ज्यादा देर तक पृथ्वी पर रहती है। इसलिए इस दिन को साल का सबसे बड़ा दिन कहते है। इसे सोल्सटाइस भी कहते है। यह एक लेटिन भाषा से लिया गया शब्द ‘Solstitium’ से बना है। जिसका अर्थ है सूरज अभी भी खड़ा है।

आज का दिन साल का सबसे बड़ा दिन और साल की सबसे छोटी रात होती है। क्योंकि गर्मियों में उत्तरी गोलार्द्ध में सूर्य का प्रकाश ज्यादा और दक्षिणी गोलार्द्ध में सूर्य का प्रकाश कम अवधि के लिए पड़ता है. जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। जिसके कारण दिन छोटे तथा रातें लंबी होने लगती हैं. 21 सितंबर को रात और दिन की अवधि बराबर हो जाती है. इसके बाद दिन रातों के मुकाबले छोटे होते जाते हैं. 21 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है. यह एक हर साल होने वाली घटना है और दक्षिणी गोलार्द्ध में इसके ठीक विपरीत होता है।

आज के दिन की खास बात यह है कि इस दिन सूरज की किरणें पृथ्वी पर लगभग 15 घंटे तक रहती है। अर्थात् 15 घंटे तक सूरज नहीं ढलता। इसी कराण उत्तरी गोलार्द्ध में रह रहे लोगो के लिए इसे गर्मी की शुरुआत माना जाता हैं। दूसरी तरफ दक्षिणी गोलार्द्ध में रह रहे लोगो के लिए ये सर्दी की शुरुआत होती है.

इस दिन सूरज की किरणें आसमान में सीधे कर्क रेखा के उपर होती है। यही एक ऐसा दिन है। जब सूर्य उत्तरी स्थान पर आसमान में ढलने से पहले ही पहुंच जाता है. आपको बता दें कि यही एक ऐसा समय है कि सोल्सटाइस पूरी दुनिया में एक ही समय पर होता है। कहा जाता है कि इस दिन के बाद ही दिन छोटे होने लगते है और रातें बड़ी होनी लगती है। इसलिए सर्दियों में दिन जल्दी ढल जाता है और अंधेरा जल्दी हो जाता है।