
सीहोर. मनुष्य को गौ माता की सेवा करना चाहिए। गोवर्धन का अर्थ है गौ संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गौ संवर्धन से ही हो सकता है। यह उद्गार ग्राम बिजौरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान बुधवार को कथा वाचक पंडित कपिल कृष्ण महाराज ने श्रद्धालुओं से कही।
कथा के दौरान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का बचपन बड़े संघर्ष से गुजरा है। उनके पैदा होते ही कंस उन्हें मारने के लिए अनेक राक्षस भेजने लगा, बकासुर धेनुकासुर पूतना आदि अनेक राक्षस उन्हें मारने आए लेकिन प्रभु ने सबको मोक्ष गति प्रदान की।
बच्चों को संस्कारवान बनाएं, ताकि वे संस्कारित हो
गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पहले बृजवासी दीपावली से अगले दिन इंद्र भगवान की पूजा किया करते थे लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें बताया कि हमें गोवर्धन जी की पूजा करनी चाहिए तो बृज वासियों ने गोवर्धन भगवान की पूजा की तो इंद्र भगवान रुष्ट हो गए और आपत्ति कालीन मेघों को बृज को तहस-नहस करने के लिए भेज दिया लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी छोटी उंगली पर उठा कर इंद्र देव के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा की। कथा के दौरान कथा वाचक ने कहा कि अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं, ताकि वे संस्कारित हो।
आज होकर श्री कृष्ण रुकमणी विवाह मंचन
ग्राम बिजौरा में जारी सात दिवसीय भागवत कथा में गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण और माता रुकमणी विवाह का प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। ग्राम में दोपहर में भागवत कथा और रात्रि आठ बजे से रामलीला का मंचन किया जाएगा। आयोजन समिति ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर बारह बजे से तीन बजे हा ेरही है, जबकि रात को रामलीला का आयोजन किया जा रहा है।