एक दिन पहले ही घर से खुशी-खुशी मकर संक्रांति का मेला जाने बाइक पर निकले तीन दोस्त असमय काल के गाल में समा गए। तीन घरों में मासूूम बच्चे सिसक-सिसक कर रो रहे थे, तो पत्नी बार-बार बेहोश हुए जा रही थीं, जब इन घरों से अर्थियां उठीं तो हर एक आंख नम हो गई। वहीं मृतकों के परिवार को लेकर हर कोई चिंता जाहिर कर रहा है, कि अब इनका गुजारा कैसे होगा, मासूम बच्चों का क्या होगा? वहीं मातम का आलम ये था कि दुकानें भी बंद रहीं।
घंसौर निवासी संतोष यादव, गुल्ठू यादव एवं अन्नू बर्मन होटल में काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। ये तीनों बाइक पर सवार होकर शनिवार को मकर संक्रांति मेला मंडला जा रहे थे, तभी किंदरई थाना क्षेत्र के ग्राम कटिया में सामने से आ रहे कंटेनर-ट्रक से टकराकर हो गई थी।
रविवार को जब घंसौर नगर के अलग-अलग इलाके में रहने वाले इन युवाओं के घर से अर्थी उठी तो परिवार के लोग बार-बार बेहोश हो रहे थे, वहां मौजूद हर कोई बस यही कह रहा था कि तीनों अपने परिवार के मुखिया थे अब इन गरीब परिवार का गुजारा कैसे होगा।
गौरतलब है कि मृतक संतोष यादव की चार बेटियां हैं,एक बेटा है, अब परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। इसी तरह गुल्ठू यादव के यहां दो बेटियां, पत्नी है, वही परिवार का मुखिया था। इसी तरह तीसरे मृतक अन्नू बर्मन का परिवार भी आर्थिक रुप से इतना सक्षम नहीं है, कि वह अपना गुजारा कर सके, हालांकि शासन से इन परिवार को मुखिया की मृत्यु के उपरांत अंत्येष्टि के लिए कुछ आर्थिक सहायता मिली है। अंत्येष्टि में बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।