नेशनल हाइवे-44 पर सडक़ हादसा का सिलसिला लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद भी समय पर रेस्क्यू टीम नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में सडक़ हादसा होने पर घायलों की जान पर बन आ रही है।
सिवनी. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) नेशनल हाइवे पर वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हो गया है। नेशनल हाइवे-44 पर सडक़ हादसा का सिलसिला लगातार बना हुआ है। इसके बावजूद भी समय पर रेस्क्यू टीम नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में सडक़ हादसा होने पर घायलों की जान पर बन आ रही है। बुधवार रात ऐसे ही एक हादसे ने व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी। छपारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाइवे-44 पर रात लगभग 8 बजे दो ट्रकों की टक्कर हो गई। त्वरित रेस्क्यू टीम के न पहुंचने से तीन घंटे चालक ट्रक के केबिन में फंसा रहा। गनीमत रही कि चालक की जान बच गई। हादसे की वजह से नेशनल हाइवे पर लंबा जाम लग गया। सूचना पाकर पहुंची चार थानों की पुलिस ने घंटों मशक्कत के बाद जाम खुलवाया।
सुबह 4 बजे तक जूझते रहे पुलिसकर्मी
छपारा थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाइवे-44 पर बुधवार की शाम उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी अरविंद यादव(40) अपने पिता धनीराम यादव(65)के साथ ट्रक में लोहे की पाइप लेकर जबलपुर की तरफ जा रहे थे। ट्रक अरविंद चला रहा था। वहीं दूसरा ट्रक मक्का लेकर झिलमिली से नेशनल हाइवे की तरफ आ रहा था। इसी दौरान रणधीर नगर और झिलमिली गांव के पास दोनों ट्रक की टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक के केबिन में चालक अरविंद बुरी तरह फंस गया। तीन घंटे बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। पिता धनीराम को मामूली चोटें आने पर प्राथमिक उपचार के लिए छपारा भेजा गया। अरविंद को केबिन से निकालने के लिए पुलिस और प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। काफी देर बाद कटर की सहायता से अरविंद को बाहर निकाला गया।गंभीर हालत में उसे जिला चिकित्सालय सिवनी रेफर किया गया। हादसे के बाद एनएच-44 के दोनों तरफ लंबा जाम लग गया। स्थिति को संभालने के लिए छपारा, बंडोल और लखनादौन थाना की पुलिस बल पहुंची। लखनादौन एसडीओपी अपूर्व भलावी के नेतृत्व में पुलिस टीम गुरुवार सुबह 4 बजे तक जाम खुलवाने और यातायात सुचारू करने में पसीना बहाती रही।
करोड़ों रुपए के वसूल रहे टोल, फिर भी संसाधन नहीं
सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) आता है। एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, निर्माण, रखरखाव और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा हाइवे पर सुरक्षा सुनिश्चित करता है और टोल के माध्यम से राजस्व जुटाता है। नेशनल हाइवे-44 पर आए दिन सडक़ हादसे हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि घायलों को त्वरित सहायता नहीं मिल पा रही है। जबकि एनएचएआई करोड़ों के टोल चालकों से ले रही है। आपातकालीन समय के लिए पर्याप्त संसाधन होने चाहिए।
चालक की चली गई थी जान
बीते 11 फरवरी को लखनादौन की मड़ई घाटी में दो ट्रकों की टक्कर हो गई थी। हादसे में एक ट्रक का चालक डेढ़ घंटे तक केबिन में फंसा रहा। समय पर सहायता न मिलने से उसकी जान चली गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीकी संसाधनों की कमी के चलते घायल तड़प कर मर रहे हैं।
एक ट्रक की बैटरी हुई चोरी
एक तरफ पुलिस घायलों को अस्पताल पहुंचाने एवं जाम खुलवाले में जुटी रही वहीं कुछ लोग मौके का फायदा उठाकर एक ट्रक से बैटरी चोरी कर फरार हो गए।
इनका कहना है…
यातायात नियम का पालन करने से ही सडक़ हादसों में कमी आएगी। चालकों को इस पर ध्यान देना होगा। एनएचएआई के अधिकारियों के साथ जल्द ही संसाधनों को लेकर बैठकर कर व्यवस्था बनाई जाएगी।
सुनील मेहता, एसपी, सिवनी