नई ट्रेनों के सौगात की उम्मीद, कार्य परियोजना को लेकर बजट का भी इंतजार
सिवनी. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को केन्द्रीय आम बजट के साथ रेल बजट भी पेश किया। हालांकि अभी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर मंडल के अंतर्गत चल रही रेल परिजनाओं को लेकर कितना बजट मिला है इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। दरअसल बजट जारी होने के बाद हर एक मंडल की परिजनाओं सहित अन्य कार्यों को लेकर पिंक बुक जारी होती है। इसमें किस कार्य के लिए कितना बजट दिया गया है इसकी विस्तृत जानकारी होती है। वर्तमान में अमृत भारत स्टेशन योजना(गति शक्ति) के तहत सिवनी रेलवे स्टेशन में करोड़ों के कार्य चल रहे हैं। बजट के अभाव में इस परियोजना की गति मंद न पड़े, इसके लिए बजट में प्रावधान की उम्मीद है। इसके अलावा कई ऐसे कार्य हैं जिसमें बजट की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय बजट में लगातार दूसरी बार रेलवे को 2.64 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए है और 4.60 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्टों को भी मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही अलग-अलग श्रेणियों की करीब 350 नई ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा देश में अगले एक साल में 200 वंदे भारत, 100 अमृत भारत और 50 नमो भारत ट्रेनें चलाए जाने की योजना है। वंदे भारत में एसी और स्लीपर ट्रेनें शामिल होंगी। नए प्रोजेक्टस में नई रेल लाइन, अंडर पास और रेलवे की डबल लाइन जैसे काम है। इसके अलावा फ्लाई ओवर शामिल हैं।
सिवनी में इन प्रोजेक्ट की जरूरत
सिवनी रेलवे स्टेशन में दिव्यांगों, बुजुर्गों के लिए लिफ्ट, बैटरी वाहन की सुविधा की दरकार है। इसके अलावा स्टेशन पर यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था की सख्त जरूरत है। शौचालय, ठंडा पानी सहित अन्य सुविधाओं के साथ ही प्रर्याप्ट ट्रेनों की जरूरत है। वर्तमान में जबलपुर तक केवल एक ट्रेन की सुविधा है। जबकि दिन में कम से कम तीन ट्रेनों की जरूरत है। इसके अलावा भोपाल तक एक इंटरसिटी एक्सप्रेस की भी दरकार है। यात्रियों को केवल पातालकोट एक्सप्रेस की सुविधा भोपाल एवं दिल्ली तक मिल रही है। यह भी ट्रेन आए दिन देरी से चलती है। पेंचवैली एक्सप्रेस की सुविधा पाने के लिए सिवनीवासियों को छिंदवाड़ा तक की दौड़ लगानी पड़ती है। जिले के कई ऐसे यात्री है जो जनरल बोगी में सफर करते हैं। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद उन्हें सीट नहीं मिलती। इन सबको देखते हुए सिवनी से सीधे भोपाल, इंदौर, दिल्ली तक कम से कम दो ट्रेनों की सुविधा की जरूरत है।
डबल लाइन कार्य की भी मिलनी चाहिए स्वीकृति