सिवनी

चरवाहे से लेकर धर्माचार्य तक बोलते हैं कबीर की वाणी

- सदगुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव में द्वितीय दिवस हुआ सत्संग

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Jun 21, 2024
सत्संग में सम्बोधित करते आचार्य।

छपारा. नगर में आयोजित सदगुरु कबीर प्राकट्य महोत्सव एवं तीन दिवसीय सत्संग समारोह के द्वितीय दिवस गुरुवार को आचार्य ने सद्गुरु कबीर के दर्शन में कबीर कौन हैï? कहां से आए हैं? सदगुरु कबीर का राम परम तत्व उनका ईश्वर कौन है? कबीर का सहज योग शब्द सुरती साधना इत्यादि विषयों पर सत्संग हुए।


कहा कि विश्व गुरु भारत संतों का देश है। ऋषियों-मुनियों का देश है। अवतारों का देश है। कृषि प्रधान देश के नाम से समूचे विश्व में जाना जाता है। विश्व में कुछ और भी देश हैं जो भारत से अर्थनीति, औद्योगिकरण, टेक्नोलॉजी, परमाणु आदि व्यवस्थाओं में आगे हो सकते हैं, परंतु यह सर्वमान्य सत्य है की आध्यात्मिकता के क्षेत्र में जितनी भारतवर्ष की पहुंच है, इसका मुकाबला विश्व का कोई भी देश नहीं कर सकता।


कहा कि पूरे विश्व के लोग आध्यात्मिकता की प्यास बुझाने के लिए भारत ही आते हैं, इसलिए आज भी भारत विश्व का गुरु है। उन्होंने उपस्थित जन समूह को सदगुरु कबीर साहेब का संक्षिप्त परिचय कराते हुए कहा कि संतमत के प्रवर्तक, सत्य-अहिंसा के पथ प्रदर्शक, नैतिक आध्यात्मिक मानवीय मूल्यों के पोषक, हिंदू-मुस्लिम कौमी एकता के अवतार, साक्षात पूर्ण ब्रम्ह, सत्य पुरुष परमात्मा के ही प्रत्यारूप कबीरदास हैं।


कहा कि सद्गुरु कबीर का दर्शन एवं उनकी वाणी जीवन के हर संदर्भ में, हर मोड़ पर सभी मानव समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसलिए तो उनकी वाणी एक छोटे से चरवाहे से लेकर बड़े-बड़े धर्माचार्यों के बीच बड़े ही सम्मान के साथ बोली जाती है। यदि सदगुरु कबीर के दर्शन को समग्र रूप से समझ लिया जाए तो मनुष्य की सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है और व्यवहार में लाने पर एक आदर्श जीवन का निर्माण हो सकता है। सद्गुरु कबीर किसी जाति-पाति, व्यक्ति, संप्रदाय या मजहब का नाम नहीं, कबीर तो साक्षात पूर्ण ब्रम्ह हैं। उनकी वाणी शुद्ध मानवता पूर्ण सार्वभौमिक सत्यमुक्ति का सत्य विचार है। सदगुरु की आरती के पश्चात प्रसाद वितरण के साथ द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का समापन हुआ।

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