परियोजना पांच वर्ष में पूरी की जाएगी। यह परियोजना महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के गोंदिया, जबलपुर, मंडला, सिवनी एवं बालाघाट जिलों को लाभान्वित करेगी।
सिवनी. केन्द्र सरकार ने कैबिनेट बैठक में गोंदिया-जबलपुर रेललाइन दोहरीकरण परियोजना को स्वीकृति दे दी है। लगभग 231 किमी दोहरीकरण परियोजना कार्य के लिए अनुमानित लागत 5,236 करोड़ रुपए रखी गई है। परियोजना पांच वर्ष में पूरी की जाएगी। यह परियोजना महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के गोंदिया, जबलपुर, मंडला, सिवनी एवं बालाघाट जिलों को लाभान्वित करेगी। यह मार्ग हावड़ा-मुंबई उच्च घनत्व नेटवर्क एवं इटारसी-वाराणसी मार्ग को जोड़ता है, जिससे उत्तर एवं दक्षिण भारत के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। इस परियोजना से 7.6 मिलियन टन वार्षिक अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता, प्रति वर्ष 16 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की कमी(लगभग 63 लाख वृक्षारोपण के समतुल्य) सहित अन्य लाभ होगा। यह परियोजना कान्हा नेशनल पार्क एवं पेंच टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी को भी बढ़ाने में मददगार होगा एवं ऊर्जा संयंत्रों एवं खनन क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी।
पूर्व सांसद ने उठाई थी मांग
सिवनी-बालाघाट के पूर्व सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन ने गोंदिया से जबलपुर के मध्य रेललाइन दोहरीकरण की मांग संसदीय कार्यकाल और वर्तमान में भी केन्द्रीय रेल मंत्री से पत्राचार एवं व्यक्तिगत भेंटकर उठाई थी। उन्होंने परियोजना की मंजूरी मिलने पर खुशी जताई।
सिवनी से नैनपुर एवं नागपुर तक मांग अब भी अधूरी
सिवनी से नैनपुर एवं नागपुर तक रेललाइन दोहरीकरण की भी सख्त दरकार है। इसकी मांग भी कि जा रही है। दरअसल इस रेललाइन पर अब धीरे-धीरे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ी का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कई बार ऐसा होता है जब एक ट्रेन को पास कराने के लिए दूसरी ट्रेन को घंटों स्टेशन पर रोक दिया जाता है। इससे ट्रेन में बैठे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोहरीकरण से यह समस्या दूर हो जाएगी।