खुद के साथ परिवार भी अच्छी जिंदगी गुजार सके इसलिए कोई आफिस में बैठकर फाइल, कम्प्यूटर पर, फील्ड पर काम करता है, तो कोई कड़ी धूप में पसीना बहाता है। लेकिन जब उम्र साथ नहीं देती लेकिन पेट की आग जलती रहती है, तब भी जो लोग किसी के आगे हाथ न फैलाकर खुद्दारी की जिंदगी जीते हैं, ऐसे ही लोगों में से एक है 60 साल की बुजुर्ग हिरोंदा बाई।
नेशनल हाईवे नंबर-7 पर सिवनी शहर से नागपुर रोड पर करीब 10 किमी दूर नंदौरा गांव में सड़क किनारे रोजाना ही ये महिला कभी अमरूद, कभी आम और कभी चना बूट, बेर बेचने बैठ जाती है। सुबह से शाम तक यह बुजुर्ग ग्राहकों का इंतजार इस उम्मीद करती रहती है, कि कोई आकर कुछ खाने का सामान खरीद ले तो ये अपने गुजारे के लिए दो वक्त की रोटी जुटा सके।
इस दिनों जब तेज ठण्ड पड़ रही है, तब भी यह महिला सड़क किनारे अमरूद से भरी टोकरी लिए बैठी नजर आ रही है, नजदीक जाने पर ठण्ड से कांपते हाथ-पैर वाली यह बुजुर्ग ऐसे उम्मीद भरी नजरों से देखती है, कि जैसे वह हमारा ही इंतजार कर रही थी। इसकी बोली भी मीठी और ग्रामीण होती है, वह कहती है ताजी-मीठी बिही (अमरूद) 20 रुपया किलो ले लो साहब, पास के बगीचा की है। लोग इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। टोकरी के अमरूद भी वाकई मीठे होते हैं। इस उम्र में भी जिंदगी की जद्दोजहद करती ये बुजुर्ग सड़क पर हर किसी को जिंदगी का सबक जरूर देती है।